सुदामा चरित्र कथा का वर्णन: भागवत कथा में बोले कथा वाचक, बिना धर्म के मोक्ष नहीं और बिना अर्थ के काम नहीं


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भरतपुरएक घंटा पहले

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भरतपुर। मोहनजी मंदिर में हुई भागवत कथा में सुदामा चरित्र कथा का वर्णन किया गया।

  • भरतपुर के मोहनजी मंदिर में आयोजित हुई भागवत कथा

शहर में बुध की हाट स्थित मोहनजी मंदिर में आयोजित भागवत कथा में कथावाचक पंडित पवित्र मोहन मुदगल ने कहा कि भागवत कथा भोगियों के लिए नहीं, बल्कि साधकों के लिए है। जो मानव भगवान श्री नारायण के चरण कमलों की साधना करता है वह इस संसार रूपी मोह-माया के जाल से निकल कर परम पद को प्राप्त करता है।

बुधवार को भीमद् भागवत के विश्राम की कथा करते हुए सुदामा चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि धर्म से वृति योग से ज्ञान, ज्ञान मोक्षप्रद वेद बखाना …. यानी अर्थ और काम तथा मोक्ष और धर्म का जोड़ा है। काम की सिद्धि अर्थ के बिना नहीं होती, वासना की पूर्ति के लिए पैसे चाहिए।

इसी तरह मोक्ष के लिए धर्म चाहिए। बिना धर्म के मोक्ष नहीं और बिना अर्थ के काम नहीं। कथावाचक पवित्र मोहन ने कहा कि भगवान कृष्ण मन के भीतर की पवित्रता के लिए सद्विचारों की खेती का सुझाव देते हैं। अर्थात अच्छा सोचें, अच्छा सुनें, अच्छा ही बोलें।

दूसरों के अवगुणों को त्याग कर सद्गुणों को ग्रहण करें। ऐसे ही अपने बाल सखा सुदामा का उद्धार किया। इसके अलावा सभाजित कथा, गुरू दत्तात्रेय के 24 गुरू का वर्णन, राजा निमि को नवयोगेश्वरों का वर्णन आदि कथाओं का वर्णन किया।

प्रारंभ में पंडित नवनीत मोहन, मनु मुदगल, जगमोहन मुदगल, गोपेश वशिष्ठ, हिमांशु मुदगल, केशव मुदगल, लक्ष्मी देवी, बृजलता मुदगल, कृष्णलता, स्नेहलता, प्रमोद चंसोरिया, हर ख्याल शर्मा, पार्षद दीपक मुदगल आदि ने भागवत भगवान की आरती पूजन किया। प्रारंभ में कृष्णा शर्मा, आचार्य नितिन, पं. गणेश शर्मा, जीतेन्द्र भारद्वाज ने वेद मंत्रों से पूजन किया।

रिपोर्ट: प्रमोद कल्याण

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