श्रीरामदेव पशु मेला: मिल गई स्वीकृति; अब 15 दिन चलेगा पशु मेला बिजली-पानी फ्री मिलेगा, चारे की भी व्यवस्था होगी


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नागौर2 मिनट पहले

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नागौर. ट्रैक्टर के पीछे ढाेल में पानी लाकर पशुओं को पिलाने ले जाते पशुपालक।

  • बैल-अश्व के साथ सर्वाधिक पहुंचे ऊंट, स्थगित मेला शुरू कराने को भास्कर ने चलाया था अभियान
  • ग्राउंड रिपोर्ट : मेला मैदान बबूल की झाड़ियों से अटा, घरों से पानी मांगकर बुझा रहे पशुओं की प्यास

पशुपालकों के लिए यह अच्छी खबर है। नागाैरी बैलों का विश्व विख्यात श्रीरामदेव पशु मेले के आयोजन करवाने को लेकर राज्य सरकार ने हरी झंडी दे दी है। दरअसल, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक जगदीश बरवड़ द्वारा भेजी गई गलत रिपोर्ट के चलते मेला स्थगित हो गया था।

इसके बाद दैनिक भास्कर ने पशु मेले का हो आयोजन को लेकर अभियान चलाया। सांसद हनुमान बेनीवाल व कांग्रेसी नेता सवाई चाैधरी ने सरकार को पत्र लिखे। पशुपालन विभाग की सचिव डॉ. आरुषि मलिक के विशेष प्रयास से राज्य में कोरोना काल में यह पहला पशु मेला है जो सरकारी प्रक्रिया के तहत आयोजित होगा।

अब मेले में विधिवत रूप से ध्वाजारोहण होगा, 15 दिन तक चलेगा। इसकी रूपरेखा जारी की जाएगी। पशुपालन विभाग को मेला मैदान की सफाई के साथ पानी, बिजली, चारा की वो सभी व्यवस्था करनी होगी, जो पूर्व में भरे गए पशु मेलों के दाैरान की थी। इसके लिए विभाग के आदेश जारी किए हैं।

गलत रिपोर्ट से स्थगित हुआ था मेला

नागाैर पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक जगदीश बरवड़ ने काेराेना काल में पशु प्रतियोगिता व सांस्कृतिक कार्यक्रम में भीड़ जुटना बता पशु मेला स्थगित करवा दिया था। बाद में विराेध खड़ा हुआ ताे जिला प्रशासन की ओर से पशुपालन विभाग को लिखित में पूर्ण सहयोग दिए जाने संबंधी सहमति दी। संयुक्त शासन सचिव पशुपालन को पत्र भी लिखा। अब विभाग ने मेले आयोजन की स्वीकृति दे दी है।

1. सफाई : नगर परिषद ने पशु प्रतियोगिता कार्यक्रम स्थल की सफाई करवाई है, मगर पशुपालन विभाग की तरफ से झाड़ियां हटाने का कार्य शुरू नहीं किया गया।

2. बिजली : मेला मैदान में बिजली की व्यवस्था के लिए तार खिंचवा कर बल्ब लगाने थे, अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ, जिसके चलते मेला मैदान में अंधेरा छाया हुआ है।

3. पानी : पशुओं की प्यास बुझाने मैदान हाैद बने है। मरम्मत नहीं हाेने से टूटे पड़े है, गंदगी से अटे है। न मरम्मत हुई, न सफाई, पानी के लिए पशुपालक तरस रहे है।

4. चारा : पशुओं के लिए निर्धारित रेट पर चारा, अस्थाई उचित मूल्य की दुकान स्थापित होनी थी, मगर…माैके पर कुछ नहीं हुअा। चारा के लिए पशुपालक भटक रहे है।

पशुपालक बाेले : अंधरे में गुजार रहे रातें, पानी भी नहीं

मैं 11 बैल तीन दिन पहले बिक्री के लिए मेले में लेकर आया हूं, यहां आया तो पता चला पानी बिजली की व्यवस्था नहीं है। बैलों की प्यास बुझाने के लिए रोज शहर के घरों से ट्रैक्टर पर पानी लेकर आ रहे है। इस बार पशुपालन विभाग की तरफ से यहां कोई व्यवस्था नहीं की गई हैं। -मेहराम चौधरी, पशुपालक नराधणा।

हमें आए 4 दिन हो गए है, पीने और पशुओं के लिए पानी घरों से मांगकर ला रहे है। रात को मैदान में अंधेरा छा जाता है, हम मोमबत्ती जलाकर रात गुजारने को मजबूर है। अधिकारी मैदान में बल्ब तो लगवा देते, बिल के पैसे नहीं है तो पशुपालक ही दे देंगे। -नथूदास, पशुपालक, सोनेली।

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