वैज्ञानिकों का अनूठा विरोध: दो साल के बाद भी नौकरी नहीं हुई ‘पक्की’, तो कृषि वैज्ञानिकों ने गुस्से में आकर अपने सिर मुंडवा लिए


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बीकानेर27 मिनट पहले

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बीकानेर के कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मांगों के लिए सिर मुंडवाते हुए।

सरकारी नौकरी में वेतन सहित अनेक मुद्दों पर कर्मचारी आंदोलन होते रहते हैं, कभी धरना लगाया जाता है तो कभी पुतले फूंके जाते हैं लेकिन कुछ लोग अनूठा विरोध करके अपना ध्यान खींच ही लेते हैं। बीकानेर के स्वामी केशवानन्द कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसा ही काम किया है। दरअसल, अपनी मांगों को लेकर कृषि वैज्ञानिकों में से कुछ ने शनिवार को अपना सिर ही मुंडवा लिया। आंदोलनकारी वैज्ञानिकों का कहना है कि इस कदम के बाद भी सरकार का ध्यान आकृष्ट नहीं होता है तो विश्वविद्यालय को बंद करवा दिया जायेगा।

विश्वविद्यालय परिसर में ही आंदोलन कर रहे वैज्ञानिकों ने बताया कि उनकी नौकरी को दो वर्ष का समय हो चुका है। उन्हें नियुक्ति के समय ही बताया गया था कि दो साल में उनका प्रोबेशन पीरियड खत्म हो जाएगा और वेतन लाभ व अन्य भत्ते मिलने शुरू हो जायेंगे। अब जब दो साल पूरे हो गए हैं तो विश्वविद्यालय इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। स्थायी नहीं होने की वजह से वैज्ञानिक अपने भविष्य को लेकर आशंकित है, वहीं कई तरह के वित्तीय लाभ नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। आज मूंडन करवा चुके सहायक प्राध्यापक रणवीर यादव बताते हैं कि उन्हें स्थायी नहीं करने तक आंदोलन जारी रहेगा। जरूरत पड़ी तो विश्वविद्यालय को बंद किया जायेगा। उन्होंने बताया कि सभी विश्वविद्यालय कर्मचारियों को सातवां वेतन आयोग दे चुके हैं लेकिन स्वामी केशवनन्द विश्वविद्यालय में अब तक सातवां वेतन आयोग का लाभ नहीं मिला है।

आर्थिक स्थिति खराब है

दरअसल, इस विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति खराब है। कॉलेज में स्टूडेंट्स की संख्या बहुत कम है और उनकी फीस भी ज्यादा नहीं आती। वहीं सरकार की ओर से भी अधिक लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे में यहां कर्मचारियों को सेवानिवृति के बाद पेंशन तक नहीं मिल पाती।

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