विधानसभा में वागड़: सूरत में कुशलगढ़ के 15 लाेगाें काे डंपर ने कुचला- क्या वजह थी कि लाेग सड़क किनारे साेए थे, हमने राेजगार के लिए क्या किया?


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बांसवाड़ाएक घंटा पहले

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राजकुमार रोत, चौरासी विधायक।

  • बीटीपी से चाैरासी विधायक राजकुमार राेत ने उठाया पलायन का मुद्दा, बाेले- 30 से 40% परिवारों का गुजरात में मजदूरी के लिए पलायन

विधानसभा में शुक्रवार काे चाैरासी विधायक राजकुमार राेत ने बांसवाड़ा और डूंगरपुर के मुद्दे प्रभावी ताैर पर उठाए। राेत ने कुशलगढ़ क्षेत्र में एक माह के भीतर हुए दाे बड़े हादसाें के जरिए पलायन-बेराेजगारी का मुद्दा उठाया। राेत ने सदन में कहा कि अभी दाे दिन पहले कुशलगढ़ में 4 बेटाें की हत्या के बाद पिता का स्वयं आत्महत्या करना और एक महीने पहले सूरत में मजदूरी करने गए 15 लाेगाें की रात काे सड़क हादसे में माैत हाे गई।

यह क्या कारण है। हम यह साेच रहे हैं कि आदमी ने दारू पी रखी है। हम साेच रहे है कि डंपर चढ़ गया। लेकिन असल में वजह यह जाननी है कि क्या वजह है कि वाे लाेग सड़क किनारे साेए थे। पूरे क्षेत्र में 30 से 40 प्रतिशत लाेगअपनी बीवी-बच्चाें और पूरे परिवार के साथ गुजरात में मजदूरी के लिए जाते है। 15 लाेगाें की माैत में पूरा परिवार खत्म हाे गया।

इससे यहीं साबित हाेता है कि आज तक हमने गरीबाें, बेराेजगाराें और आदिवासियाें के लिए क्या काम किया है। सवाल उठाया कि पूरे क्षेत्र में 30 से 40 प्रतिशत लाेग अपनी बीवी-बच्चाें और पूरे परिवार के साथ गुजरात में मजदूरी के लिए जाते है। सूरत में 15 लाेगाें की माैत में पूरा परिवार खत्म हाे गया। इससे यहीं साबित हाेता है कि आज तक हमने गरीबाें, बेराेजगाराें और आदिवासियाें के लिए क्या काम किया है।

दाे बड़े डैम बने हुए। एक माही ताे दूसरा कड़ाना डैम जाे गुजरात में है। दाे डैम का विकास हुआ लेकिन क्या हुआ। माही का सारा पानी गुजरात उपयाेग कर रहा है। उस क्षेत्र में जाे लाेग विस्थापित हुए वह लाेग बंजर जमीन पर जाकर रह रहे हैं। वही लाेग आज गुजरात जाने काे मजबूर हैं। इसलिए आज ऐसी घटनाएं हाे रही हैं।

सरकार बांध बनने के दाैरान हुए समझाैते के अनुसार गुजरात सरकार काे उसका हिस्सा दे, ताकि माही व कड़ाना का पानी डूंगरपुर और बांसवाड़ा के लाेगाें काे पर्याप्त रूप से उपलब्ध कराया जाए। लाेग मरते है तब हम 2 लाख, 5 लाख रुपए दे देते है। लेकिन इससे पहले हम व्यवस्था करें कि ये लाेग गुजरात ही नहीं जाएं।

चुनाव हाेने वाले थे इसलिए हमारे नेताओं ने ही युवाओं काे कांकरी डूंगरी पर चढ़ाया ताकि वाेट बैंक बढ़े

राेत ने डूंगरपुर की कांकरी डूंगरी घटना काे राजनीति की ही उपज बताते हुए सिस्टम पर सवाल खड़े किए। बाेले- प्रशासनिक अधिकारियाें ने कार्यवाही कर दी। सरकार ने, विपक्ष ने भी दाव खेले। लेकिन क्या कारण रहा कि वाे घटना हुई। यह भर्ती से जुड़ा मामला था। 1167 पद खाली रह गए थे, उन्हें लेकर लड़के काेर्ट में गए थे। काेर्ट ने एसटी के छात्राें से सीटें भरने का आदेश दिया। लेकिन दूसरा पक्ष डीबी में गया और वहां हार हाे गई। फिर यहीं लड़के सुप्रीम काेर्ट गए।

लेकिन हमारी जाे गंदी राजनीति चल रही है। मै किसी का नाम नहीं लूंगा। हमारे नेताओं ने इन्हें काकरी डूंगरी पर चढ़ाया वाे इसलिए कि जनवरी-फरवरी में पंचायतीरात के चुनाव हाेने वाले थे, ताकि युवा आकर्षित हाे, वाेट बैंक बढ़े। लेकिन उनकी किस्मत ऐसी कि उस साल चुनाव हुए ही नहीं। सितंबर 2020 में फिर काकरी डूंगरी पर चढ़े, 18 दिन तक बैठे रहे। पुलिस द्वारा जबरन उतारने का प्रयास किया गया, लड़काें के साथ मारपीट हुई, 24 सितंबर काे मीटिंग में इस मामले के संबंध में निर्णय हाेना था, लेकिन मीटिंग कैंसल हाे गई। फिर कुछ लड़के राेड पर उतर आए, जाे उन्हाेंने गलत किया।

क्या इस देश में पहले कभी आंदाेलन नहीं हुए। काेई सड़काें पर नहीं आया, चलाे माना उन्हाेंने गलत किया, जाम हाेते ही लाठीचार्ज कर दिया, फायरिंग की। लेकिन उन लड़काें काे हमारे इस सिस्टम ने ही 18 दिन तक कांकरी डूंगरी पर बिठाया।

1996 में काम शुरू हुआ, आज तक पूरा नहीं हुआ, भीखाभाई नहर आगे बन रही है, पीछे टूट रही है… यह कैसा विकास है

भीखाभाई नहर बन रही है। 1996 से काम चल रहा है, लेकिन आज तक काम पूरा नहीं हुआ। आगे काम हाे रहा है, पीछे टूट रहा है। सरकार हर बजट में मरम्मत का पैसा दे रही है। यह काैनसा विकास है, हम किस दिशा में जा रहे है। मैं न पक्ष पर न विपक्ष पर आराेप लगा रहा हूं। लेकिन जाे स्थिति बनी हुई है, जिस तरीके से हम काम कर रहे हैं, उस पर सवाल उठता है। हम लाेग सही काम नहीं कर रहे है।

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