विधानसभा में मंत्री का विवादित बयान: शांति धारीवाल बोले- जिस राजा के नाम देश का नाम पड़ा उसकी कुंडली में ही भ्रष्टाचार था


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जयपुरएक घंटा पहले

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विधानसभा में जेल और एसीबी की अनुदान मांगों के जवाब में मंत्री शांति धारीवाल के बयान पर विवाद हो गया।

  • धारीवाल ने कहा- विधायक खरीद-फरोख्त मामले में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह के खिलाफ एसीबी में चल रहे मुकदमे की जांच में तेजी लाई जाएगी

विधानसभा में जेल और एसीबी की अनुदान मांगों पर बहस का जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने देश की कुंडली में ही भ्रष्टाचार बता दिया। राजा दुष्यंत और शकुंतला की पौराणिक कथा का हवाला देते हुए धारीवाल ने जिस राजा के नाम देश का नाम पड़ा उनकी कुंडली में भ्रष्टाचार बताया तो भाजपा विधायकों ने कड़ी आपत्ति की। नेता प्रतिपक्ष सहित कई विधायकों ने विरोध किया। इस पर सभापति राजेंद्र पारीक ने जिस राजा के नाम पर देश का नाम है उस शब्द को कार्यवाही से निकाल दिया।

धारीवाल ने कहा, ‘मैं वही बातें बता रहा हूं जो बातें ऋषि मुनियों ने कही हैं, यह बात मैंने खुद थोड़े ही कही है। भ्रष्टाचार आज कहां नहीं है, कम हो या ज्यादा हर देश में भ्रष्टाचार है। कई देशों में हमसे ज्यादा भ्रष्टाचार है।

विधायक खरीद-फरोख्त मामले में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह के मुकदमे की एसीबी जांच में तेजी लाई जाएगी
मंत्री शांति धारीवाल ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सहित अन्य पर विधायक खरीद फरोख्त मामले में जुलाई में एसीबी में दर्ज मामले की जांच में तेजी लाने की घोषणा की है। धारीवाल ने कहा कि जिस एसीबी मुकदमे में संजय जैन, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह आरेापी थे। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को गिराने की साजिश के लिए पैसे के लेनदेन के आरोप थे। मैं एसीबी के अफसरों से कहूंगा कि तेजी से जांच करें।

भाजपा सरकार में घोषित डकैत को एसीबी में लगा दिया था
धारीवाल ने कहा कि चार माह के लिए नवदीप सिंह को एसीबी में लगाने वाली कौन सी सरकार थी? जितना पैसा सब भ्रष्ट अफसरों ने अब तक नहीं खाया होगा, उतना पैसा वह अकेले ही खा गया। धारीवाल ने गुलाबचंद कटारिया को इंगित करते हुए कहा कि सरकार के तत्कालीन गृह मंत्री के हाथ में कुछ नहीं था तो ऐतराज तो कर सकते थे न आप। घोषित डकैतों को एसीबी में लगा दिया था।

केंद्र में तो एक ही लोकायुक्त है न सबका
धारीवाले ने कहा कि लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होने पर सवाल उठाए गए। हमने तो 23 माह में ही लोकायुक्त बनाया। भाजपा राज में भी बाद में ही बनाया था। केंद्र में तो आज तक नहीं बनाया। केंद्र में तो एक ही लोकायुक्त है न सबका।

अनुदान की मांगें पारित करने के समय धारीवाल से हुई चूक, कागज खो दिया
जेल और एसीबी की अनुदान मांगें पारित करवाते वक्त धारीवाल से चूक हो गई। अनुदान की मांगों की राशि लिखा हुआ कागज धारीवाल को नहीं मिला। कुछ समय ढूंढने के बाद भी कागज नहीं मिला तेा बिना राशि का उल्लेख किए ही धारीवाल ने अनुदान की मांगें पारित करवाने का प्रस्ताव किया।अनुदान की मांगों को पारित करवाने का प्रस्ताव उनकी राशि और मद बताते हुए रखा जाता इै, बाद में उन पर सदन की राय लेकर ध्वनिमत (वॉयस वोटिंग) से पारित करवाया जाता है।

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