विधानसभा में भिड़े नेता: मंत्री उदयलाल आंजना पर नेता प्रतिपक्ष कटारिया को गाली देने का आरोप, सफाई में कहा- वे मेरे बड़े भाई की तरह


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जयपुर2 घंटे पहले

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विधानसभा में सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना भिड़ गए

  • स्पीकर ने कहा- सदन में नेता प्रतिपक्ष का भी उतना ही सम्मान जितना CM का है
  • आंजना बोले- कटारिया मेरे बड़े भाई की तरह, मैं उन्हें गाली देने की बात सोच भी नहीं सकता

विधानसभा में बुधवार को फोन टैपिंग के मुद्दे पर बहस के दौरान हुए हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद गाली गलौच को लेकर जमकर विवाद हुआ। हंगामे के कारण दूसरी बार सभापति महेंद्रजीत मालवीय ने सदन की कार्यवाही आधा घंटे के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद भी भाजपा और कांग्रेस विधायकों के बीच सदन में बहस चलती रही। इसी दौरान भाजपा के सचेतक जोगेश्वर गर्ग और विधायक अनीता भदेल ने सहकारिता मंत्री उदय लाल आंजना पर आरोप लगाया कि उन्होंने नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया को गाली दी है।

भाजपा के आरोप पर आंजना ने सफाई देते हुए कहा कि किसी को गाली नहीं दी, लेकिन शोर-शराबे के बीच कटारिया उत्तेजित होकर आंजना से भिड़ गए। आंजना भी तैश में आ गए और दोनों एक दूसरे को देख लेने की धमकी देने लगे। भाजपा के उपनेता राजेंद्र राठौड़ भी बोले कि सदन में मां-बहन की गाली सुनने के लिए नहीं आए हैं। ये बर्दाश्त नहीं करेंगे। कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने यह कहते हुए आंजना का बचाव किया कि उन्होंने किसी को गाली नहीं दी। लेकिन, भाजपा विधायक यह मानने को तैयार नहीं थे। आंजना भी भाजपा विधायकों की तरफ बढ़ने लगे तो तकनीकी शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग ने उन्हें पकड़ा और जबरदस्ती बाहर ले गए।

इसके बाद सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो स्पीकर सीपी जोशी ने कहा कि मुझे बताया गया कि उदयलाल आंजना जी और कटारिया जी के बीच बहस हो गई। सदन में जितना सम्मान मुख्यमंत्री का है। उतना ही सम्मान नेता प्रतिपक्ष का भी होना चाहिए। इसके बाद स्पीकर ने कटारिया से मामले को खत्म करने की अपील की। इसके बाद विवाद खत्म हो गया और विधानसभा में अनुदान मांगों पर बहस शुरू हुई।

आंजना बोले- कटारिया मेरे बड़े भाई की तरह, मैं उन्हें गाली देने की बात सोच भी नहीं सकता
विवाद के शांत होने के बाद उदयलाल आंजना ने कहा, ‘गुलाबचंद कटारिया का मैं बड़े भाई की तरह सम्मान करता हूं, वे हमारे मेवाड़ के बड़े नता हैं। मैं उन्हें गाली देने की बात सोच ही नहीं सकता, गाली देना मेरे नेचर में ही नहीं हैं। मैं तो केवल कटारियाजी को समझा रहा था और फिर चला गया। बाद में पीछे से भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी की वजह से इसे मुद्दा बनाया गया और मुझे बदनाम करने के लिए कटारिया जी को गाली देने का आरोप लगाया गया।’

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