विडंबना: प्रदेश में 44 फीसदी पशु चिकित्सों के पद खाली, जो पद भरे हैं वह भी शहरी क्षेत्रों में बने चिकित्सा केन्द्रों पर हैं तैनात


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जयपुर14 दिन पहले

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राजस्थान में पशु चिकित्सा अधिकारी के 3011 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 1350 पद खाली पड़ें हैं।

पशु प्रधान राज्य होने के कारण राजस्थान में सबसे अधिक पशुधन ग्रामीण इलाकों में हैं। पूरे प्रदेश के बात करें तो केवल 56 फीसदी ही पशु चिकित्सा अधिकारी के पद भरे हैं। ये जो पद भरे हैं इसमें भी अधिकांश चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में बने पशु चिकित्सा केन्द्रों के बजाय संभागीय स्तर या जिला मुख्यालयों पर बने चिकित्सालयों में ही तैनात हैं। राजस्थान श्रमजीवी पशुपालक संघ ने इस संबंध में सरकार को पत्र लिखाकर पशु चिकित्सकों को ग्रामीण इलाकों में बने चिकित्सालयों में नियुक्त करने की मांग की है।

संघ की ओर से लिखे पत्र में प्रदेशाध्यक्ष विनोद कुमार सैनी ने बताया कि वर्तमान में पूरे प्रदेश में बर्ड फ्लू का खतरा मंडरा रहा है। इस संक्रमण का खतरा पक्षियों के साथ-साथ पशुओं में भी फैलने की आशंका है। राजस्थान में 80 फीसदी पशुधन ग्रामीण इलाकों में हैं। लेकिन विडंबना ये हैं कि ग्रामीण इलाकों में बने पशु चिकित्सालयों में स्वीकृत पशु चिकित्सकों के अधिकांश पद खाली पड़े हैं।

3011 पद है स्वीकृत

उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी के 1211 और पशु चिकित्सा अधिकारी के 1800 पद स्वीकृत हैं। इनमें से वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी के 250 पदों पर और पशु चिकित्सा अधिकारी के 1100 पदों पर ही अधिकारी नियुक्त हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से ज्यादातर अधिकारी जयपुर सहित अन्य संभागीय मुख्यालयों पर बने पशु चिकित्सा केन्द्रों या जिला स्तर पर बने चिकित्सा केन्द्रों पर अपनी पोस्टिंग करवाकर बैठे हैं।

जबकि इनकी सबसे ज्यादा जरूरत ग्रामीण इलाकों में हैं, जहां सबसे ज्यादा पशुधन हैं। ग्रामीण इलाकों में पशु चिकित्सालयों का जिम्मा पशुधन सहायकों के कंधों पर हैं। ऐसे में ग्रामीणों को मजबूरन इलाज के लिए निजी चिकित्सकों या शहरों की तरफ आना पड़ता है।

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