राहत: पाली के पहले एमवीआर तकनीक के ट्रीटमेंट प्लांट के लिए कंसेंट-टू-ऑपरेट जारी, 300 केएलडी पानी की क्षमता हाेगी


  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Pali
  • Continuous to operate Release For Pali’s First MVR Technology Treatment Plant, 300 KLD Water Capacity Will Be Available

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

पाली2 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
  • प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने दाे साल के इंतजार के बाद दी मंजूरी, उपभाेग पानी का नियमित हिसाब रखना हाेगा

राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने करीब दाे साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पुनायता औद्याेगिक क्षेत्र की ज्याेति टैक्सटाइल मिल्स में स्थापित 300 केएलडी के एमवीआर तकनीक के ट्रीटमेंट प्लांट काे कंसेंट-टू-ऑपरेट जारी कर दी है। इस प्लांट काे लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें 95 प्रतिशत से अधिक तक पानी काे री-यूज किया जा सकता है।

इसमें ट्रीट करने के बाद केमिकल्स वेस्ट भी काफी कम मात्रा में रहता है। अब माना जा रहा है कि आधुनिक तकनीक के इस प्लांट काे कंसेंट जारी करने के बाद अन्य उद्यमियों में भी ऐसे प्लांटों के प्रति रुझान बढ़ेगा। वर्तमान में दाे अन्य फैक्ट्रियों में इस प्लांट काे लगाया गया है। इनकी कंसेंट भी शीघ्र ही जारी हाेने की उम्मीद है। बाेर्ड ने प्लांट की कंसेंट जारी करने के साथ ही कई शर्तें भी लगाई है। इन शर्तों की पालना नहीं करने पर कार्रवाई का प्रावधान भी हाेगा। सीईटीपी के पूर्व उपाध्यक्ष व प्रमुख उद्यमी कमलेश सत्कार ने अपनी फैक्ट्री में करीब 4 कराेड़ रुपए की लागत का एमवीआर तकनीक का ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया था। इस प्लांट काे देखने के बाद विधायक ज्ञानचंद पारख तथा मारवाड़ जंक्शन विधायक खुशवीरसिंह जाेजावर ने विधानसभा में तारीफ की थी। यह कंसेंट ज्योति टैक्सटाइल, विपुल डाकलिया तथा कमलेश जैन तीनाें काे मिलाते हुए 300 केएलडी की जारी की है।

प्लांट संचालन के बाद सीईटीपी से कनेक्टिविटी कटेगी, शर्तों का पालन भी जरूरी

1. सीईटीपी की तरफ से आबंटित की गई केएलडी काे वापस सरेंडर करना हाेगा 2. भूखंड क्षेत्र के 40 प्रतिशत हिस्से काे ग्रीन बेल्ट विकसित करना, अगर जगह नहीं ताे बाहर करना हाेगा 3. ट्रीटेड-अनट्रीटेड पानी का उपयोग पाैधाें समेत किसी काे पिलाने में उपयोग नहीं हाेगा 4. ट्रीट पानी के बाद शेष स्लज का निस्तारण 90 दिन में करना हाेगा 5. बिना केंद्रीय भू-जल बाेर्ड की अनुमति के भू-जल का दाेहन नहीं हाेगा 6. जहां से भी भू-जल का दाेहन हाेगा, वहां पर मीटर लगाने हाेंगे 7. बाॅयलर में एलपीजी, सीएनजी व पीएनजी का उपयोग करना हाेगा 8. प्लांट में खर्च किसी भी प्रकार की एनर्जी का रिकाॅर्ड मेनटेन करना हाेगा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *