राहत की उम्मीद: 70 विद्यार्थियों के अभिभावकों को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ी आस, शैक्षणिक सत्र 2020-21 की स्कूल फीस पर आएगा अंतिम फैसला


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जयपुर3 मिनट पहले

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प्रदेश के लगभग 70 विद्यार्थियों के अभिभावकों की नजर आज देश की सबसे बड़ी न्यायालय सुप्रीम कोर्ट पर है। फीस मामले को लेकर आज कोर्ट में सुनवाई होगी और उस पर फाइनल निर्णय आएगा। इसमें यह तय होगा कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 की अभिभावकों की कितनी स्कूल फीस देनी होगी। हालांकि इससे पहले 8 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश सुनाते हुए 100 फीसदी फीस जमा करवाने के लिए कहा था।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश मैनेजिंग कमेटी सवाई मानसिंह विद्यालय, गांधी सेवा सदन, सोसायटी ऑफ कैथोलिक एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस सहित फी-रैग्युलेशन एक्ट 2016 को चुनौती देने वाली भारतीय विद्या भवन सोसायटी की एसएलपी पर संयुक्त सुनवाई करते हुए दिया था।

6 किश्तों में फीस चुकाने का दिया था आदेश
8 फरवरी को जारी आदेशों में सुप्रीम कोर्ट ने अभिभावकों को फीस मार्च माह से चुकाने के लिए कहा है, जो 6 मासिक किश्तों में चुकानी होगी। ये किश्त 5 मार्च से शुरू होगी। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फीस जमा नहीं कराए जाने के कारण किसी भी बच्चे का नाम स्कूल से नहीं कटेगा। साथ ही 10 वीं व 12 वीं के बच्चों को भी फीस जमा नहीं कराए जाने पर परीक्षा में बैठने से वंचित नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा राज्य सरकार को भी कहा है कि वह स्कूलों के राइट टू एजुकेशन (RTE) एडमिशन की बकाया राशि एक महीने में दे। स्कूलों का RTE के पेटे राज्य सरकार पर करीब 210 करोड़ रुपए का बकाया चल रहा है। वहीं सर्वोच्च अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के 18 दिसंबर के आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें निजी स्कूल संचालकों को राज्य सरकार के 28 अक्टूबर के आदेश की सिफारिशों के अनुसार फीस वसूल करने की छूट देते हुए राज्य सरकार के फीस तय करने के निर्णय में दखल देने से इंकार कर दिया था।

सरकार ने 28 अक्टूबर को आदेश जारी कर राजस्थान बोर्ड ऑफ सैकेण्डरी एजुकेशन (RBSC) से मान्यता प्राप्त स्कूलों को 60% और सेंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेण्डरी एजुकेशन (CBSE) से मान्यता प्राप्त स्कूलों को 70% फीस वसूलने के लिए कहा था।

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