मेयर बनाम सरकार: संचालन समितियों को निरस्त करने का मामला विधानसभा में उठाने की तैयारी में भाजपा, कोर्ट का रास्ता भी विकल्प के तौर पर रखा


  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Jaipur
  • BJP In Preparation To Raise The Matter Of Repeal Of The Steering Committees In The Assembly, The Way Of Court Was Also Kept As An Option

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

जयपुरएक घंटा पहले

  • कॉपी लिंक

जयपुर नगर निगम में समितियों के मामला अब उलझता जा रहा है। समितियों को निरस्त करने के आदेशों के बाद मेयर और भाजपा पार्षद इस मुद्दे पर कानूनी राय ले रहे है। वहीं दूसरी ओर इस मामले को अब भाजपा की ओर से विधानसभा में भी उठाने की तैयारी की जा रही है। जयपुर के कुछ भाजपा विधायक इसे सदन में उठा सकते है। सूत्रों के मुताबिक नगर निगम के तमाम पार्षद इस मामले पर पार्टी स्तर पर भी चर्चा करना चाहते है, लेकिन एक मार्च को प्रस्तावित राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे को देखते हुए समय नहीं मिल पा रहा है।

उपमहापौर पुनीत कर्णावत ने बताया कि जिन 20 समितियों को सरकार ने निरस्त किया है, उनका कानूनी तौर पर स्वायत्त शासन निदेशक कोई तर्क नहीं दे पा रहे। केवल वह संकल्प प्रस्तुत नहीं करने का हवाला दे रहे है। सवाल ये उठता है कि सरकार को कैसे नहीं पता कि बोर्ड बैठक में संकल्प पेश नहीं किया। बोर्ड हमारा है और 50% से ज्यादा सदस्य बोर्ड के समर्थन में है। उन्हीं की मौजूदगी में बाहरी सदस्यों को समितियों में नियुक्त करने पर सहमति बनी है। इस हिसाब से संकल्प स्वत: ही माना जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस गलत रवैये को हम विधायकों के जरिए विधानसभा में भी उठवाएंगे।

आयुक्त ने भी माना है कि 20 समितियां सही है, तभी सचिव नियुक्त किए

उपमहापौर ने बताया कि सरकार ने जिन 7 अतिरिक्त समितियों को निरस्त किया है उसमें आयुक्त के नोट ऑफ डिसेंट (विसम्मत टिप्पणी) का हवाला दिया है। लेकिन जिन 21 समितियों में से 20 समितियों (कार्यकारी समिति को छोड़कर) को निरस्त किया है, उनमें तो आयुक्त की कोई टिप्पणी नहीं थी, फिर भी उन्हें निरस्त कर दिया। जबकि आयुक्त ने स्वयं इन समितियों को सही माना है। यही कारण रहा कि समितियां बनने के बाद आयुक्त ने ही आदेश जारी कर समितियों के सचिवों की नियुक्ति करते हुए चेयरमैनों को चैम्बर अावंटित किए है।

सरकार ने समितियां निरस्त करने के ये बताए कारण

– जिन 7 अतिरिक्त समितियों का गठन किया, उनकी नियमानुसार राज्य सरकार से पहले मंजूरी नहीं ली।

– इसके अलावा जिन 21 समितियों को बनाया गया, उसमें 3-3 सदस्य जीतकर आए पार्षदों में से न होकर अलग हैं, जो नियमानुसार सही नहीं है।

– बाहरी व्यक्ति को समिति में सदस्य बनाए जाने से पहले कुछ शर्तो होती है, जिन्हे पूरा नहीं किया। इसमें सबसे प्रमुख ये है कि जिस व्यक्ति को सदस्य बनाया जा रहा है, क्या उनका संकल्प प्रस्तुत किया। इसके अलावा क्या वह व्यक्ति पार्षद बनने की योग्यता रखता है।

सरकार बना सकती है समितियां

नगर निगम और स्वायत्त शासन निदेशालय में पूर्व में विधि निदेशक रहे अशोक सिंह का कहना है कि इस मामले में बोर्ड की तरफ से नगर पालिका की धारा 56 का वॉयलेशन हुआ है। इसके तहत बोर्ड को पहले बाहरी सदस्यों के लिए संकल्प पेश करना था साथ ही बोर्ड सदस्यों की योग्यता का निर्धारण भीा। जिसे आधार मानते हुए सरकार ने इसे निरस्त किया है। अब दो विकल्प है या तो बोर्ड की तरफ से वापस संशोधित प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भिजवाए या फिर सरकार अपने स्तर पर ही समितियां बना दे। क्योंकि नगर पालिका एक्ट में प्रावधान है कि 90 दिन के बाद सरकार अपने स्तर पर समितियां बना सकती है।

खबरें और भी हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *