मुआयना: कवकनाशी दवा और मैनकोजेब का छिड़काव करें किसान


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सैंपऊ18 दिन पहले

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  • मौसम के उलटफेर से खराब हो रही थी आलू और सरसों की फसल, बचाने के लिए खेतों में पहुंचे कृषि अधिकारी

मौसम के उलटफेर से झुलसा रोग की चपेट में आई आलू फसल की खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग हरकत में आ गया। कृषि विभाग ने अलग-अलग टीम गठित कर फसल के हालात जानने के लिए भेजी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने आलू एवं सरसों फसल का निरीक्षण कर किसानों के हालात जाने हैं। पिछले करीब 12 दिनों से चल रहे खराब मौसम ने आलू एवं सरसों फसल को भारी प्रभावित किया है। आलू फसल को झुलसा रोग ने चपेट लिया है, तो वही सरसों फसल में तना गलन एवं सफेद रोली रोग ने दस्तक दी है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से रूबरू होकर फसल बचाव के उपाय बताए हैं। सबसे अधिक आलू फसल में नुकसान की संभावना बताई जा रही है। इसमें 40 से 50% तक फसल में नुकसान हुआ है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेतों पर पहुंचकर किसानों के साथ चर्चा की है।

फसलों का निरीक्षण कर काश्तकारों को रोग उपचार के उपाय बताए। धौलपुर जिले में प्रमुख रूप से सरसों, गेहूं, आलू, चना, मटर के साथ नगदी फसलें की जाती हैं। लेकिन पिछले 12 दिनों से मौसम के उलटफेर ने खेती का गणित बिगाड़ दिया है। पाला, कोहरा, सर्द हवा एवं बारिश ने रवि फसल को भारी प्रभावित किया है। जिले में करीब 10 हजार एकड़ में आलू फसल की बुआई की है।

आलू व सरसों की संयुक्त फसल में स्टेपडोसाइकलिंन 2 ग्राम प्रति लीटर के अनुपात में दवा डालें : धर्मेंद्र कुमार

सहायक कृषि अधिकारी धर्मेंद्र कुमार सैंपऊ उपखंड इलाके में फसल खराबे का जायजा लेने परोआ, लुधपुरा, चितौरा समेत करीब एक दर्जन गांवों में पहुंचे। उन्हांने कहा कि किसान कवकनाशी दवा का छिड़काव करें, उसके साथ मैनकोज़ेब दवा का भी फसल के पौधों पर स्प्रे करें। इसके लिए 400 से 500 ग्राम प्रति बीघा के अनुपात में दवा का उपयोग करना होगा। दवा का घोल 10 से 15 लीटर पानी में तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया दूसरी बीमारी आलू एवं सरसों दोनों फसलों में संयुक्त रूप से है।

इसके लिए काश्तकार जीवाणु नाशक दवाओं का प्रयोग करें। स्टेपडोसाइकलिंन 2 ग्राम प्रति लीटर के अनुपात में दवा डालकर दोनों फसलों के तनों पर छिड़काव करें, इसका उपयोग करने से 10 से 15 दिन के अंतर्गत तना गलन रोग से फसल को मुक्ति मिल जाएगी। उन्होंने बताया मिर्च की फसल में भी शुरुआत में रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसके लिए काश्तकार कवकनाशी दवा का प्रयोग कर कीड़े से फसल को बचा सकते हैं।

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