महंगे इंधन ने बढ़ाया दबाव: एयरलाइन कंपनियों को राहत, डोमेस्टिक फ्लाइट्स की सिर्फ 20% सीटों का किराया रेंज के मिड प्वाइंट से कम रखना होगा


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17 दिन पहले

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  • 25 मई 2020 को दोबारा उड़ान भरने की इजाजत देते वक्त सरकार ने 40% सीटें सस्ती रखवाई थी
  • सस्ती सीटों की व्यवस्था 24 फरवरी को खत्म हो रही थी, लेकिन अब यह 31 मार्च तक लागू रहेगी

एयरलाइन कंपनियों को अब डोमेस्टिक फ्लाइट्स की सिर्फ 20% सीटों का किराया मैक्सिमम और मिनिमम फेयर के बीच वाले किराए से कम रखना होगा। सरकार की तरफ से हुई कम किराए वाली ऐसी सीटों की व्यवस्था 24 फरवरी को खत्म होनेवाली थी, लेकिन अब यह 31 मार्च तक लागू रहेगी। एयरलाइन कंपनियों को 25 मई 2020 को जब दोबारा उड़ान भरने की इजाजत दी गई थी तब 40% सीटों के लिए ऐसा व्यवस्था कराई गई थी।

समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च की गई

शुक्रवार को एविएशन मिनिस्ट्री ने ऑर्डर जारी कर किराये पर लगाई गई लिमिट के खत्म होने की समय सीमा को बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दिया। हालांकि उसने एयरलाइन कंपनियों को राहत देते हुए कम किराए वाली सीटों की संख्या घटाकर आधी यानी 20% कर दी। एयरलाइन इस बात का रोना रो रही थीं कि पिछले साल की मई के मुकाबले जेट फ्यूल का दाम काफी ऊपर आ चुका है। उनका कहना था कि ऑपरेटिंग कॉस्ट में हुई बढ़ोतरी की भरपाई करने के लिए उन्हें सरकार या तो रेंज ऊपर की तरफ बढ़ाने दे या फिर उसको खत्म ही कर दे।

छह महीने में 50% महंगा हुआ जेट फ्यूल

1 जून 2020 को एक हजार लीटर जेट फ्यूल की कीमत दिल्ली के टर्मिनल 3 पर 26,860 रुपये और मुंबई में 26,456 रुपये थी। जनवरी 2021 को दिल्ली में जेट फ्यूल का दाम 39,324 रुपये और मुंबई में 37,813 रुपये प्रति 1000 लीटर हो गया था जो पिछले साल जून से 50% ज्यादा था। गौरतलब है कि एयरलाइन कंपनियों के 40% कामकाजी खर्च का इंधन में लगता है।

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