भाजपा सरकार धोखाजीवी है: तीन काले कृषि कानूनों से वन अधिकार कानून को कमजोर किया जा रहा : वृंदा


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उदयपुरएक घंटा पहले

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  • माकपा नेता- बजट में आदिवासियों की योजनाओं में कटौती की

आदिवासी एकाधिकार मंच की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और माकपा की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने बुधवार को भाजपा और कांग्रेस दाेनाें पार्टियों पर एकसाथ हमला बोला। केंद्र की भाजपा सरकार को धोखाजीवी करार दिया तो राज्य सरकार काे दमनकारी बताया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में पीड़ित आदिवासी को बजट में राहत की उम्मीद थी, लेकिन केंद्र सरकार धोखाजीवी है। बजट का देश की 8.6 फीसदी आबादी के हिसाब से आवंटित होना चाहिए, लेकिन महज 2.5 फीसदी आवंटित हुआ। यहां तक कि आदिवासियों की योजनाओं में बढ़ोतरी की बजाय कटौती की गई है।

यही हाल एकलव्य स्कूल के लिए दिए फंड की है। जनजाति विद्यार्थी ऑनलाइन एजुकेशन से वंचित रह गए। कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हर तरह से कॉर्पोरेट को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो रही है। तीन काले कृषि कानूनों को लागू कर आदिवासियों के हक में बना वन अधिकार कानून को कमजोर किया जा रहा है ।

उन्होंने विद्यालयों के विकास के लिए पीपीपी मॉडल के नाम पर बजट देने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने जुलाई में काकरी डूंगरी प्रकरण को आदिवासियों का संघर्ष बताते हुए राज्य सरकार पर दमनकारी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। राज्य सरकार पर काकरी डूंगरी हिंसा की आड़ में आदिवासियों काे झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप भी लगाया और निर्दोष आदिवासी युवाओं को छोड़ने व उनके मुकदमे वापस लेने की मांग की।

मांगों को लेकर 25 से प्रदर्शन

आदिवासियों की मांगों को लेकर टीएडी आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। इसमें एकलव्य आवासीय स्कूल में पद भरने आदि मांगें हैं। इसे लेकर 25 फरवरी तहसील, 18 मार्च जिला मुख्यालय और 22 अप्रैल को संभागीय आयुक्त कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन होगा। राज्य महासचिव विमल भगोरा ने बताया कि आदिवासियों की जनसंख्या के अनुपात में प्रशासनिक सेवाओं में 6.5 फीसदी आरक्षण देने, जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग के छात्रावासों-स्कूलों में स्थाई नियुक्ति आिद के लिए प्रदर्शन होगा।

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