भरतपुर में 11 को महाशिवरात्रि पर अनेक कार्यक्रम: बुध ग्रह कुंभ राशि में करेंगे प्रवेश, शिव पूजा से कालसर्प दोष, मंगल, गुरु चांडाल दोष से मिलेगी मुक्ति


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भरतपुर6 मिनट पहले

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महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च को।

महाशिवरात्रि पर्व 11 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन शिवलिंग दर्शन और पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र है। ऐसे अवसर पर शिव पूजा करने से कालसर्प दोष, मंगल, गुरु चांडाल दोष, अंगारक एवं राहु, केतु तथा चंद्रमा के अशुभ दोषों से मुक्ति मिलती है।

ज्योतिषाचार्य राम भरोसी भारद्वाज के अनुसार हिंदू पंचांग में फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस दिन कुंभ राशि में चंद्रमा, सूर्य, शुक्र, बुध, ग्रह का संचरण होगा। इसके साथ ही शिव योग में धनिष्ठा नक्षत्र के होने से मानव तंत्र में ऊर्जा का प्रभाव प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर रहेगा। योगी साधक भक्त शरीर को सीधी स्थिति में रखकर और सारी रात जागरण करेंगे। इसी दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से धन, सौभाग्य, समृद्धि संतान और आरोग्य की प्राप्ति के साथ समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

दोष मुक्ति की प्रार्थना है शिव आराधना

महाशिवरात्रि के दिन वैदिक विधि द्वारा पूजन करने से कालसर्प दोष, मंगल दोष, गुरु चांडाल दोष, अंगारक योग एवं राहु, केतु तथा चंद्रमा के अशुभ होने से व्यक्ति को मानसिक तनाव होता है। महाशिवरात्रि पर शिव पूजा अर्चन से सभी तरह के दोष एवं दांपत्य जीवन से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती हैं तथा जिन कन्याओं के विवाह में देरी या किसी प्रकार की बाधा आ रही है तो भगवान शिव के आशीर्वाद से मनचाहा वर की प्राप्ति भी होती है। मान्यता है कि प्राचीन समय में इस तिथि पर देवी पार्वती और शिवजी का विवाह हुआ था। एक अन्य मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और ब्रह्माजी के सामने शिवजी लिंग रूप में प्रकट हुए थे।

बुध का राशि परिवर्तन
इस बार शिवरात्रि पर बुध ग्रह का राशि परिवर्तन हो रहा है। बुध 11 मार्च को मकर से कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। शिवरात्रि पर सभी राशि के लोग शिव पूजा करनी चाहिए। शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं और ऊं सांब सदा शिवाय नम: मंत्र का जाप करें। शिवलिंग पर बिल्व पत्र और धतूरा भी चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर मंत्र जाप करें। इधर, महाशिवरात्रि पर्व के लिए शिवालयों में तैयारी प्रारंभ हो गई है। रंग-रोगन, बिजली सजावट, भोग-प्रसादी, पूजा-अर्चना, जागरण आदि की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। चौदह महादेव, चौमुखा, अग्रेश्वर, तिलेश्वर,अर्द नारेश्वर, गुप्तेश्वर, डालमिया वाले शिवालय आदि में तैयारियां जारी हैं।

कंटेंट : प्रमोद कल्याण, भरतपुर

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