भरतपुर पुलिस बेड़े में 20 लाख के 11 घोड़े: काम धेला का नहीं, फिर भी घाेड़ाें के पालन-पाेषण और पुलिस के जवानाें के वेतन पर सालाना 72 लाख रुपए खर्च


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भरतपुर40 मिनट पहले

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भरतपुर। पुलिस बेड़े में शामिल घोड़े। पुलिस के पास 11 घोड़े हैं।

  • जिला पुलिस में 11 घोड़े, इनकी ड्यूटी पर तैनात हैं 11 कांस्टेबल और एक हैड कांस्टेबल

हर सरकारी विभाग में कुछ पद ऐसे होते हैं, जिन पर आसीन कर्मचारियों के पास काम धेला का भी नहीं होता। हां कभी कभार ही साल में कुछ दिन उन्हें अपनी ड्यूटी निभानी होती है, बाकी समय में वे मौज में ही बिताते हैं।

पुलिस महकमे में भी इसका नजारा देखा जा सकता है। जिला पुलिस के बेड़े में करीब 20 लाख रुपए कीमत के 11 घोड़े भी शामिल हैं। वहीं घुड़सवारी की ड्यूटी के लिए प्रत्येक घोड़े के हिसाब से 11 ही सिपाही तैनात हैं, और घुड़साल का इंचार्ज हैड कांस्टेबल भी तैनात है।

इसके अलावा तीन साईस घुड़साल की सफाई कार्य आदि के लिए लगाए हुए हैं। घोड़ों के पालन पालन-पोषण और तैनात पुलिस कार्मिक व साईस के वेतन पर पुलिस विभाग सालाना करीब 72 लाख रुपए खर्च कर रहा है, लेकिन घुड़सवार पुलिस को साल में कभी कभार ही ड्यूटी देनी होती है।

असल में घुड़सवार पुलिस की खासी जरूरत भीड़ नियंत्रण के लिए ही पड़ती है, लेकिन जिले में ऐसा कभी कभार ही होता है, जब भीड़ नियंत्रण के लिए घुड़सवार पुलिस का उपयोग है। साल में 15 दिन के लिए दशहरा मेला जरूर लगता है, तब जरूर पुलिस के घोड़े दौड़ते दिखाई देते हैं।

वहीं कुछ दिन कोरोना काल में बाजार में पुलिस के घोड़ों को दौड़ते देखा गया। वरना अधिकांश दिनों घोड़े और इन पर सवारी करने वाले पुलिस कार्मिक घुड़साल में ही मौज मारते दिखाई पड़ते हैं। यदि इनका उपयोग शहर में गश्त के लिए किया जाए तो अपराधियों में भय भी बना रहे, साथ ही घोड़े और उनके सवार ऊर्जावान भी बने रहें ताकि बेवक्त जरूरत पड़ने पर उनकी उपयोगिता सिद्ध हो सके।

घोड़े वेतन तो नहीं लेते, मगर खर्चा वेतन से कम भी नहीं
राजस्थान पुलिस के बेड़े में सैकड़ों सिपाहियों के बीच 11 घोड़े भी शामिल हैं। ये तनख्वाह तो नहीं लेते, लेकिन इनके पालन-पोषण पर सालाना करीब 13.2 लाख रुपए खर्च होते हैं। इतना ही नहीं 12 पुलिस कार्मिक घुड़साल में तैनात है, एक कार्मिक का औसत वेतन 30 हजार मासिक माना जाए तो सालाना करीब 43.2 लाख रुपए वेतन पर खर्च होता है।

वहीं सफाई के लिए तीन सईस तैनात हैं। एक सईस का वेतन औसत 10 हजार रुपए मासिक के हिसाब से 3.6 लाख रुपए इनके वेतन पर खर्च हो जाता है। इसके अलावा माह में करीब एक लाख रुपए घोड़ों के उपचार व अन्य व्यवस्थाओं पर होता हो तो सालाना 12 लाख रुपए अन्य खर्च हो गए। इस पर इस नफरी पर पुलिस डिपार्टमेंट का सालाना करीब 72 हजार रुपए खर्च होता है।

घुड़साल में 3 विदेशी और 8 देशी नस्ल के घोड़े
पुलिस की घुड़साल में 11 घोड़े हैं, जिनमें से तीन विदेशी नस्ल (थोरो) के हैं और शेष आठ घोड़े देसी नस्ल (काठियावाड़ी व मालानी) के हैं। इन सभी के अलग-अलग नाम हैं, जिनमें भास्कर, कुश, राजा, मोहित, अभिनंदन, बहादुर, मेघ, राघव, आकाश, हैरी और स्टेप ऑन द गैस शामिल है।

जिस तरह से राजस्थान पुलिस के प्रत्येक कर्मचारी का एक सर्विस रिकॉर्ड संधारित किया जाता है, ठीक उसी तरह से सभी घोड़ों का भी सर्विस रिकॉर्ड बनाया जाता है। घुड़साल में सभी घोड़ों के पास उनके नाम, सवार, उम्र, रंग, नस्ल आदि की पट्टिका भी लगाई जाती है। साथ ही एक निश्चित उम्र 20 वर्ष पूरा होने पर इनको सेवानिवृत्ति भी दी जाती है।

जौ, चना, चापट और घास है इनका भोजन
कांस्टेबल नंदराम ने बताया कि घोड़े के खान-पान के रूप में विशेष तौर पर सर्दियों में प्रत्येक घोड़े को 500 ग्राम गुड खिलाया जाता है। वहीं प्राय: प्रत्येक मौसम में एक घोड़े को 1 किलो 300 ग्राम चना, 900 ग्राम चापट, 2 किलो 220 ग्राम जौ और 8 किलो 180 ग्राम सूखी घास व मौसम के अनुसार हारा चारा खिलाया जाता है।

खास बत ये है कि इन घोड़ों को खिलाई जाने वाली घास मामूली घास नहीं होती। अक्सर यह घास रावतभाटा चित्तौडगढ़ से या फिर मध्य प्रदेश से ही मंगाई जाती है। जिसकी कीमत करीब 1400 रुपए प्रति क्विंटल होती है। ऐसे में औसतन एक घोड़े पर खान-पान का खर्चा प्रतिमाह करीब साढे 8-10 हजार रुपए के आसपास आता है।

पुलिस विभाग में ऐसे होती है घोड़े की ज्वाइनिंग
विभाग की एक कमेटी घोड़ों की खरीदारी करती है। उसके बाद इन घोड़ों को राजस्थान पुलिस एकेडमी में 6 माह की चलने-फिरने आदि की ट्रेनिंग दी जाती है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद इन्हें जिला स्तर पर भेजा जाता है।

जहां रोजाना सुबह के वक्त इन घोड़ों की 1 घंटे मेहनत कराई जाती है, जिसमें सवार जीन लगाकर इन पर सवारी करता है। उसके बाद परिसर में ही मौजूद मिट्टी के मैदान में इनको सेंड बाथ कराई जाती है, जिससे इनकी 1 घंटे की मेहनत के बाद की थकान उतर जाती है। वहीं सर्दी के मौसम में मालिश और गर्मी के मौसम में नहलाया जाता है।

वर्जन
शहर के मुख्य बाजार में दिन के समय अक्सर जाम के हालात बने रहते हैं, ऐसे में जाम से निपटने के लिए जल्द ही घुड़सवार पुलिस से गश्त करने की व्यवस्था बनाई जाएगी। ताकि घोड़ों और इनकी ड्यूटी पर तैनात करीब एक दर्जन पुलिस कार्मिकों के वेतन आदि पर किए जा रहे खर्च का जन सेवा में उपयोग हो सके – देवेंद्र कुमार विश्नोई, एसपी भरतपुर

(रिपोर्ट: संत कौशिक)

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