बुलंद हौसले के आगे बीमारी बौनी: 12 साल के लम्बे अन्तराल के बाद काम पर लौटे मुकेश भूरिया; 90 हजार में तैयार किया सोलर-इलेक्ट्रिक व्हीकल, AVNL की रिकवरी में जुटे


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अजमेर30 मिनट पहले

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मुकेश की ईच्छा पर रिकवरी का काम सौंपते एक्सईएन दिनेशसिंह

  • 2008 में अपने साथी को करंट से बचाने के दौरान हुआ था हादसा
  • पैरालाइसिस के कारण शरीर का नीचला हिस्सा नहीं करता काम
  • घर बैठे हुए भी मिल रही थी तनख्वाह, लेकिन काम जरूरी समझा

हौसला अगर बुलंद हो और आप में काम करने का जज्बा हो तो कोई बीमारी या असक्षमता आपकी राह में रोड़ा नहीं बन सकती। इसकी मिसाल बने है अजमेर विद्युत वितरण निगम में कार्य करने वाले रामगंज में रहने वाले मुकेश भूरिया। जो 2008 में अपने साथी को करंट से बचाने के दौरान दुर्घटना का शिकार हो गए।

12 साल तक ईलाज कराने के बाद भी पैरालाइसिस के कारण उनके शरीर का नीचला हिस्सा काम नहीं कर रहा और इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। काम करने के जज्बे को लेकर 90 हजार रुपए खर्च कर सोलर-इलेक्ट्रिक व्हीकल तैयार करवाया और खुद की स्वेच्छा से रिकवरी का काम चुका। जबकि मुकेश को निगम की ओर से घर बैठे ही तनख्वाह दी जा रही थी।

मुकेश की उम्र अभी 38 साल है लेकिन जब उसके साथ यह हादसा 26 वर्ष की उम्र में हुआ और उन्होंने शादी भी नहीं की। उनका भाई रेलवे में नौकरी करता है और उसके आवास में ही मुकेश रह रहा है। उनका भाई ड्यूटी पर जाने से पहले मुकेश को वाहन में बैठाने का काम भी करता है।

ऐसे हुआ हादसा

वर्ष 2008 में उनका एक साथ करंट की चपेट में आ गया तो मुकेश ने बिजली आपूर्ति काट दी और उसे बचाने के लिए खम्बे पर चढ़ गया। बाद में जब साथी को करंट से छुड़ाया तो दोनों नीचे गिर गए। नीचे गिरने के दौरान मुकेश नीचे की तरफ था तो उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। साथी तो कुछ ही दिनों में ठीक हो गया लेकिन उनका नीचे का हिस्सा पैरालाइसिस का शिकार हो गया और ईलाज चल रहा है।

काम को दी तवज्जो

मुकेश की हालत को देखते हुए निगम ने उसकी तनख्वाह को यथावत रखा और बारह साल से उनको घर बैठे ही तनख्वाह दी जा रही थी। हर माह कभी कभार वे वाहन किराए पर कर ऑफिस जाते थे। डॉक्टर ने काम करने से भी मना कर दिया, लेकिन मुकेश ने घर में बैठ कर तनख्वाह लेना मुनासिब नहीं समझा और काम करने की ठान ली।

तैयार करवाया वाहन

मुकेश ने अपनी सक्षमता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और काम करने के लिए अपनी सुविधा के अनुसार एक इलेक्ट्रिक सोलर व्हीकल बनवा लिया। करीब 90 हजार के खर्च से बनी सोलर व्हीकल से उनको आने जाने की सहूलियत मिली।

स्वेच्छा से दिया रिकवरी का काम

मदार के अधिशाषी अभियंता दिनेशसिंह ने बताया कि मुकेश ने घर घर जाकर व मोबाइल के जरिए निगम की रिकवरी करने की ईच्छा जताई तो उनको रिकवरी का काम दिया गया है। कर्मचारी संघ के जिला मंत्री विनित कुमार जैन ने बताया कि इसके लिए उनके साथ एक हेल्पर भी लगाया है।

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