बीस साल की सजायाफ्ता शिल्पी का सवाल: जब अन्य लोगों को जमानत मिल रही है तो, आसाराम को क्यो नहीं?


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जोधपुर42 मिनट पहले

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आसाराम से मिलने पहुंची शिल्पी।

  • नाबालिग छात्रा को आसाराम तक भेजने की शिल्पकार थी शिल्पी

आसाराम को सीने में दर्द की शिकायत के बाद जेल से अस्पताल में भर्ती कराने के अगले दिन शिल्पी उर्फ संचिता भी MDM अस्पताल उनसे मिलने पहुंच गई। यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम के साथ सहआरोपी शिल्पी को बीस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी और इस समय वह जमानत पर है। काफी ना नुकर के बाद शिल्पी ने कहा कि ये कैसा न्याय है? जब अन्य लोगों को जमानत मिल रही है तो आसाराम को जमानत क्यों नहीं दी जा रही है।

MDM अस्पताल परिसर में शिल्पी ने पहले मीडियाकर्मियों को प्रवचन दिया। बाद में दावा किया कि वह अपने पर्सनल कार्य से अस्पताल आई है। उसने साफ इंकार किया कि वह आसाराम से मिलने आई है। काफी देर तक मना करने के बाद उसने कहा कि एक निर्दोष को सताया जा रहा है। वो भी झूठे आरोप लगा कर। ऐसे में आज मैं खुलकर बोलूंगी। आसाराम बिलकुल दोषी नहीं है। आज उनकी हालत देखिये। सात साल से अंदर हैं। आज तक उनको एक दिन के लिए भी जमानत नहीं दी जा रही है। मैं यह नहीं कहती कि हाईकोर्ट या सेशन कोर्ट ने गलत किया, लेकिन जब अन्य मामलों में लोगों को जमानत मिल रही है तो आसाराम को क्यो नहीं। उन्हें हार्ट की गंभीर बीमारी है। उनकी स्थिति को देखते हुए जमानत दी जानी चाहिये। हमें भी हाईकोर्ट ने जमानत प्रदान कर राहत दी है।

उल्लेखनीय है कि आसाराम के गुरुकुल की शिक्षिका रह चुकी शिल्पी के कहने पर नाबालिग छात्रा के परिजन अपनी बेटी का इलाज आसाराम से कराने को तैयार हुए। नाबालिग छात्रा को आसाराम से मिलाने की मुख्य शिल्पकार शिल्पी ही थी। यही कारण रहा कि इस मामले में कोर्ट ने शिल्पी को बीस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने उसकी सजा को फिलहाल स्थगित कर रखा है। इस कारण वे जमानत पर जेल से बाहर है।

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