बीकानेर की रेलवे क्रॉसिंग समस्या: रेलवे की दो टूक, कहा- राज्य सरकार मुफ्त जमीन दें तो भी नहीं बन सकेगा रेलवे बाइपास


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बीकानेर2 मिनट पहले

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रेलवे के महाप्रबंधक आनन्द प्रकाश बीकानेर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए।

बीकानेर की सबसे बड़ी रेलवे क्रासिंग समस्या का निराकरण होता नजर नहीं आ रहा है। पिछले दिनों कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने रेलवे बाइपास बनने की संभावना जताई थी। लेकिन, शनिवार को उत्तर-पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक आनन्द प्रकाश ने संकेत दिया है कि फिलहाल बाइपास नहीं बन सकता। दरअसल, इस प्रोजेक्ट पर 400 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। रेलवे के पास इतनी राशि खर्च करने का कोई तर्क नहीं है।

यहां पत्रकारों से बातचीत में महाप्रबंधक ने यहां तक कह दिया कि राज्य सरकार नि:शुल्क भूमि उपलब्ध करवा दें तो भी यह रेल बाइपास बनना मुश्किल है। रेलवे ने पिछले दिनों एक बार फिर सर्वे करवाया है। इसमें बीकानेर से लालगढ़ के बीच यदि सीधी नई रेल लाइन डालने पर 80 करोड़ रुपए की लागत बताई गई है, जबकि उदरामसर से कुछ दूरी पर रेल बाइपास बनाया जाता है तो इस पर 400 करोड़ रुपए की लागत आएगी।

रेलवे ब्याज पर रुपए लेकर करता है काम
रेलवे 8 प्रतिशत वार्षिक दर पर रुपया उधार लेकर विकास कार्य करवाता है। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि रेलवे इतनी बड़ी धनराशि का व्यय क्यों करेगा? हालांकि महाप्रबंधक ने स्पष्ट शब्दों में तो नहीं, लेकिन इशारों में यह बता दिया कि रेल बाइपास बनना नामुमकिन नहीं तो मुश्किल जरूर है।

डॉ. कल्ला मिले थे, लेकिन अभी कुछ तय नहीं
महाप्रबंधक ने बताया कि पिछले दिनों राजस्थान के कैबिनेट मंत्री डाॅ बी.डी. कल्ला ने उनसे मुलाकात की थी। तब रेल बाइपास के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। हालांकि अभी भी कुछ भी फाइनल नहीं है। यदि राज्य सरकार जमीन भी उपलब्ध करवा दे तो भी रेलवे के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि रेल बाइपास बनाने से रेलवे को कोई फायदा नही होगा।

इलेक्ट्रीफिकेशन साल 2023 तक
उन्होंने बताया कि 2023 तक उत्तर-पश्चिम रेलवे जोन के चारों मण्डलों में इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा हो जाएगा। पूरे जोन में तब केवल इलेक्ट्रिक इंजन से ही ट्रेन चलाई जाएंगी। बीकानेर मण्डल में इन दिनों सूरतगढ़ से लालगढ़ के बीच यह काम चल रहा है।

ये मांग भी फिजिबल नहीं
रेलवे वर्कशाॅप को इलेक्ट्रिक लोको शैड बनाने की मांग पर उन्होंने कहा कि फिलहाल तो यह फिजीबल नहीं लगता। लेकिन, अभी वर्कशाॅप के आधुनिकीकरण करने पर जोर है। रेलवे में कर्मचारियों की कमी का सवाल उन्होंने सिरे से नकार दिया।

हमारे पास जरूरत से ज्यादा कर्मचारी : एमडी
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारे पास अभी अत्यधिक अतिरिक्त कर्मचारी है। आज मशीनीकरण का जमाना है। हम रोबोटिक मशीनीकृत कार्य की ओर अग्रसर है। चीन में हमसे बहुत कम कर्मचारी हैं और अधिकतर कार्य मशीनों से ही किया जाता है।

यहां किया निरीक्षण
महाप्रबंधक आनंद प्रकाश का दो दिवसीय दौरा शनिवार को सम्पन्न हो गया। वे शुक्रवार को स्पेशल ट्रेन से बठिण्डा स्टेशन पहुंचे थे। बठिण्डा- गुरसरसहनेवाला स्टेशन के मघ्य खण्ड का विंडो निरीक्षण करते हुए संगत स्टेशन, बिरंगखेड़ा-ढाबां स्टेशनों का निरीक्षण किया। इसके अलावा उन्होंने बठिंडा – सूरतगढ़ रेल खंड पर संगरिया स्टेशन, संगरिया से हनुमानगढ़ के बीच स्पीड ट्रायल द्वारा निरीक्षण किया। इसके अलावा हनुमानगढ़ स्टेशन, डबली राठान, पीलीबंगा, रंगमहल और सूरतगढ़ स्टेशनों का निरीक्षण किया था।

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