बजट सरकार से, राजनीतिक नियुक्ति फूलबाग से: सरकार के बजट के बाद अब राजनीतिक नियुक्तियों की ओर नेताओं का कदम, अलवर में पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह करेंगे नाम तय


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अलवरएक मिनट पहले

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत।

प्रदेश सरकार का 2021-22 का बजट पेश हो चुका है। अब बजट बहस होगी। जिसमें भी विधायक अपने क्षेत्र से जुड़ी कोई छोटी-बड़ी घोषणा कराने का प्रयास करेंगे लेकिन, इसके साथ ही अब राजनीतिक नियुक्तियों पर सबकी निगहा गड़ जाएगी। राजनेताओं का मानना है कि बजट घोषणा तो सरकार ने कर दी लेकिन, राजनीतिक नियुक्तियों में अलवर के नाम फूल बाग से ही सरकार को भेजे जाएंगे। फूल बाग पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह का आवास है। अलवर ग्रामीण विधायक व श्रम राज्यमंत्री टीकाराम जूली खुद कह चुके हैं कि राजनीतिक नियुक्ति जल्दी होंगी। पूर्व केन्द्रीय मंत्री के स्तर से नाम भेजे जाएंगे। राजनीतिक गलियारों में इसकी खासा चर्चा है कि यह बजट का हिसाब आगे राजनीतिक नियुक्तियों तक भी लेकर जाएगा। कुछ नेता यह भी मान रहे हैं कि जिनके क्षेत्रों मे बजट घोषणा कम हुई उन नेताओं को आगे महत्व मिल सकता है।

बसपा, निर्दलीय व कांग्रेस को बराबर उम्मीद
अलवर जिले में 11 विधायक हैं। जिसमें से देा बसपा से जीते थे। दो निर्दलीय। पांच कांग्रेस के विधायक हैं। दो भाजपा के हैं। बसपा व निर्दलीय ने पिछले दिनों सरकार पर संकट आया तो गहलोत का साथ दिया। इस कारण इनमें से दो विधायकों को बजट में काफी कुछ दिया है। सबसे अधिक तिजारा में विकास की घोषणाएं हुई। दूसरे नम्बर पर बहरोड़ में। यहां नगर पालिका व उप तहसील के अलावा सीवरेज सहित कई अन्य छोटी-बड़ी घोषणाएं हुई हैं।

थानागाजी व किशनगढ़बास में भी घोषणा
थानागाजी में बड़ी घोषणा कम हैं। कैंप कोर्ट व एडीजे कोर्ट खोलने की घोषणा के अलावा थानागाजी में सीवरेज व अजबगढ़ भानगढ़ में विशेष परिवहन की घोषणा की गई है। पानी के इंतजाम को लेकर भी छोटी-बड़ी घोषणा हैं। जबकि किशनगढ़बास के कोटकासिम को नगर पालिका व किशनगढ़बास बम्बोरा से बोलनी वाली रोड बनाने की बड़ी घोषणा हुई हैं। इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों की तुलना में बहरोड़ व तिजारा विधानसभा क्षेत्र में अधिक घोषणा हैं। हालांकि यहां के विधायकों का कहना है कि उनके क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने पहले बड़ी घोषणाएं की थी।

अलवर में यूआईटी चेयरमैन की कुर्सी बड़ी
अलवर में यूआईटी चेयरमैन की कुर्सी सबसे बड़ी राजनीतिक नियुक्ति होगी। हालांकि इसके अलावा सरकार कई निगम व बोर्डों में भी राजनीतिक नियुक्ति करेगी। मंत्रिमण्डल का विस्तार व संसदीय सचिव बनाने के अवसर पर भी नेताओ की निगाह है। लेकिन, इन राजनीतिक नियुक्तियों के लिए अलवर के नेताओं को न सचिन पायलट को राजी करने की जरूरत न मुख्यमंत्री गहलोत को। असल, में अलवर में तो पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस कारण सब नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री के सम्पर्क में रहते हैं। हालांकि अलवर में रामगढ़ विधायक सफिया खान के पति कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जुबेर खान भी पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। उनके सम्बंध भी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी परिवार से हैं।

पायलट की खेमेबाजी के बाद मुश्किल

कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट की खेमेबाजी के बाद मंत्रिमण्डल विस्तार व राजनीतिक नियुक्तियों का गणित बैठाना बड़ा मुश्किल हो चुका है। जिसको लेकर सरकार व उनके मंत्री बार-बार एक-दो महीने में राजनीतिक नियुक्ति करने की बात कहते रहे हैं। लेकिन, सरकार के सामने नियुक्तियों के बाद विधायकों की नाराजगी सामने आने का डर है। जिसे देखते हुए राजनीतिक नियुक्ति व मंत्रिमण्डल विस्तार का गणित नहीं सुलझ सका है। लेकिन, अब बजट की घोषणाओं का हिसाब राजनीतिक नियुक्तियों के समय हो सकता है।

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