बजट पर एक्सपर्ट कमेंट: नए उद्योग की एंट्री अब भी मुश्किल, कृषि को बजट का केवल 5 प्रतिशत नाकाफी, शिक्षा में घोषणाओं को धरातल पर उतारना चुनौती


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जयपुर7 मिनट पहले

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राजस्थान बजट में उद्योग-व्यापार को राहत के बावजूद कुछ उम्मीदें पूरी नहीं हो पाईं। मंडी शुल्क और आढ़त की दर में कमी का स्वागत किया गया है। सीएम अशाेक गहलोत के तीसरे कार्यकाल के तीसरे बजट पर विशेषज्ञों ने प्रतिक्रिया में मिली-जुली बातें कही हैं।

फैडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने बजट प्रावधानों में उद्योग संबंधी समस्याओं के निपटारे की बात कही है। एमएसएमई के लिए ब्याज की दर पर 50 करोड़ रुपए के प्रावधान से राहत मिलेगी। स्टार्ट-अप के लिए 5 लाख रुपए तक की सहायता दिए जाने का कदम भी बेहतर है, लेकिन नए उद्योगों की एंट्री की प्रक्रिया का सरलीकरण नहीं किया जाना निराशाजनक है। राज्य के बहुत से औद्योगिक जिलों से ट्रांसपोर्ट की सुगम सुविधा की उम्मीदें भी पूरी नहीं हो पाईं।

एआरजी समूह के चेयरमैन आत्माराम गुप्ता का कहना है कि 50 लाख रुपए तक के मकान पर स्टांप ड्यूटी में 2 फीसदी की कमी करने से राहत मिलेगी। यदि किसी ने 50 लाख रुपए का मकान की रजिस्ट्री कराई तो उसे 1.30 लाख रुपए की बचत होगी। डीएलसी की दर में 10 फीसदी की कमी से भी स्थिति में सुधार होगा।

राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने कहा, मंडी टैक्स 60 पैसे प्रति सैंकड़ा घटाया है, मंडी टैक्स और आढ़त कम करने से व्यापारियों को फायदा होगा। केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि व्यापार व वाणिज्य अधिनियम 2020 के कारण मंडी व्यापारियों और किसानों के सामने पैदा हुई समस्याओं का बजट में की गई घोषणा से समाधान हो गया है। वेट पर एमनेस्टी स्कीम लाने से विसंगतियां दूर होंगी, इससे व्यापारी और सरकार दोनों का फायदा है।

नीति आयोग के सलाहकार कृषि विशेषज्ञ शीतल प्रसाद शर्मा ने कहा, राजस्थान में कृषि को कुल बजट का करीब 5.5 फीसदी दिया जबकि ज्यादातर राज्य 7 फीसदी देते हैं। कृषि विशेषज्ञ शीतल प्रसाद शर्मा ने कहा, देश के ज्यादातर राज्यों में उनके कुल बजट का कृषि क्षेत्र को आवंटन 7 फीसदी होता है, जबकि राजस्थान के बजट में कृषि को केवल 5.50 फीसदी हिस्सा ही आंवटित किया है। सरकार ने अगले साल से कृषि बजट अलग से लाने की घोषणा की है, लेकिन जब आपको कृषि क्षेत्र में बजट ही अन्य राज्यों से कम है तो अलग बजट का क्या फायदा। यह लोक लुभावना बजट है, इसमें किसानों के बारे में घोषणाएं तो बहुत हैं, लेकिन वे ज्यादातर केंद्र सरकार की योजनाओं की संकलित राशि का परिणाम दिखती हैं। राज्य सरकार ने बुहत ही चतुराई से केंद्र की योजनाओं की राशि से बजट की घोषणाएं तैयार की हैं। दो नए कृषि कॉलेज और 600 कॉलेजों में कृषि शिक्षा देने की घोषणा की है, लेकिन पिछले साल उच्च शिक्षा विभाग द्वारा खोले गए कॉलजों में अभी तक बिल्डिंग, स्टाफ और सुविधाए नहीं हैं।

सीए रघुवीर पूनिया ने कहा, एमनेस्टी स्कीम से अटका पैसा सरकारी खजाने में आएगा, एक लाख तक के माल को ई वे बिल से मुक्त करने से छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी। वैट 2017 में खत्म हो गया था लेकिन उसके विवाद अभी भी अपीलेट फोरम पर चल रहे हैं, सरकार ने बजट में उनके लिए एमनेस्टी स्कीम लाने की घोषणा की है, यह डिस्काउंट सेल की तरह होगी। एमनेस्टी स्कीम में अब तक ब्याज और पेनल्टी में ही छूट मिलती आई है, लेकिन इस बार की एमनेस्टी स्कीम में मूल टैक्स में भी छूट मिलेगी। इससे सरकार की रिकवरी आएगी और विवाद खत्म होंगे। रेवेन्यू की कमी से जूझ रही सरकार के खजाने में सैकड़ों करोड़ आने का रास्ता साफ हरोगा। माल परिवहन पर ई वे बिल की छूट 50 हजार थी जिसे 1 लाख कर दिया , इससे एक लाख तक का माल बिना ई बिल जा सकेगा, इससे छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी।

ज्ञानविहार यूनिवर्सिटी के चेयरमैन व शिक्षा विशेषज्ञ सुनील शर्मा ने कहा, शिक्षा क्षेत्र में की गई घोषणाएं मोडर्न एजुकेशन और शिक्षा की पुरानी प्रणालियों का एक गुड मिक्स्चर है। एडवांस टैक्नोलॉजी सेंटर खोलने की घोषणा है। स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक मॉडर्न एजुकेशन की सारी स्ट्रीम्स को कवर करते हुए घोषणाएं की गई हैं। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक घोषणाएं बहुत अच्छी हैं, ले​किन सबसे बड़ी चुनौती और सवाल है इन्हें समय पर पूरा करना। घोषणाओं के लिहाज से शिक्षा के क्षेत्र में ट्रासफोर्मेशन वाला बजट है, लेकिन क्रियान्विती पर फोकस जरूरी है। घोषणाएं समय पर पूरी हुईं तो राजस्थान मॉडर्न एजुकेशन का हब बन सकता है।

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