फ्री यात्रा में महिलाएं भूली कोरोना: रोडवेज में मुफ्त का सफर; रात से ही उमड़ी भीड़, खचाखच भरी बसों में नहीं मिली जगह, करना पड़ा इंतजार, अव्यवस्थाएं रही हावी, बच्चों को हुई ज्यादा परेशानी


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अजमेरएक घंटा पहले

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अजमेर के रोडवेज बस स्टैंड पर बसों में बैठने के लिए ऐसे उमड़ी भीड़-फोटो मोहन ठाड़ा

महिला दिवस पर रोडवेज में मुफ्त सफर का महिलाओं ने फायदा लिया। हालात यह रहे कि रात बारह बजे शुरू हुई फ्री यात्रा में भीड़ उमड़ पड़ी। बसों में महिलाओं को जगह भी नहीं मिली और घंटों इंतजार करना पड़ा। बसें भी खचाखच भरकर दौड़ी और ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों संग आई महिलाओं को हुई। अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हुई इस व्यवस्था में महिलाएं कोरोना गाइड लाइन भूल गई। सोशल डिस्टेंसिंग तो दूर की बात महिलाओं ने मास्क लगाना तक उचित नहीं समझा।

रोडवेज बस स्टैंड पर बसों के इंतजार में बैठी महिलाएं

रोडवेज बस स्टैंड पर बसों के इंतजार में बैठी महिलाएं

राजस्थान सरकार की ओर से रोडवेज बसों में रात बारह बजे से महिलाओं के लिए मुफ्त सफर की व्यवस्थाएं की गई। इस दौरान महिलाएं 24 घंटे के लिए रोडवेज बसों में कहीं का भी नि:शुल्क सफर कर सकती है। इसके लिए रात 12 बजे से ही रोडवेज बसों में महिलाओं की भीड़ देखी गई। बस के स्टैंड पर लगते ही महिलाएं सीट पर बैठने के लिए उमड़ पड़ी। बसों के खचाखच भर जाने के कारण महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ा। इस दौरान अव्यवस्थाएं भी रही। काउटर पर टिकट के लिए धक्का मुक्की भी हुई।

कोरोना गाइड लाइन भूल गए

इस दौरान उमड़ी भीड़ के कारण कोरोना गाइड लाइन भी भूल गए। अधिकांश महिलाओं के मुंह पर मास्क तक नहीं था। सोशल डिस्टेंसिंग तो दूर तक नजर नहीं आई। बसों में भी खडे़ होकर एक दूसरे से सटकर यात्रा करनी पड़ी। भीड़ को नियंत्रण करने के लिए रोडवेज प्रशासन को भी खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।

बच्चों संग आई महिलाओं के बढ़ी मुश्किल

जो महिलाएं अकेले ही यात्रा कर रही थी, वे तो जैसे तैसे बसों में चढ़ गई लेकिन अपने छोटे बच्चों के साथ आई महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी। वे बसों में अपनी जगह नहीं ले पाई और कईंयों ने भीड़ को देखते हुए वापस अपने घर भी लौटना पड़ा।

ज्यादा यात्री भार वाले मार्गों पर बढ़ाई बसें

रोडवेज प्रबन्धन ने व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए बसों को ज्यादा यात्री भार वाले मार्गों पर चलाया। जिन मार्गों की सवारियां ज्यादा थी, वहां के लिए उन मार्गों की बसों को बदल दिया, जहां यात्री भार कम था। इसके बावजूद व्यवस्थाएं नहीं बन पाई और अव्यवस्थाएं रही।

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