फीड भीलवाड़ा: लाॅकडाउन में दूसरों काे देख 6 छात्रों ने शुरू किया मुफ्त पढ़ाना अब तक 40 युवा जुड़े


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भीलवाड़ा21 दिन पहले

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फीड भीलवाड़ा से जुड़े युवा।

  • दाे महीने पहले शुरू किया सेवा कार्य, अब और युवा भी जुड़े तो बनाया संगठन शहर की 10 बस्तियाें में कर रहे सेवा कार्य

काेराेना लाॅकडाउन के दाैरान सामाजिक संगठनाें के सेवा कार्य से प्रेरित हाेकर दाे महीने पहले 6 काॅलेज छात्र-छात्राओं ने जेब खर्च से जरुरतमंदाें की सेवा कार्य शुरू की। अब करीब 40 छात्र-छात्राएं जुड़ चुके हैं, जाे ‘फीड भीलवाड़ा’ के साथ भाेजन-कपड़े वितरित भी कर रहे हैं।

ये छात्र प्रथम वर्ष से लेकर फाइनल ईयर तक के हैं। ध्रुव चाैधरी, जयंत हिंगाेरानी, देशना सिसाेदिया, प्रवीण गहलाेत, गाेविंद सिंह शेखावत व वंश गर्ग के मन में भी सेवा का जज्बा जागा और उन्हाेंने अपने जेब खर्च की राशि से जरुरतमंदाें काे भाेजन कराना, सर्दी से बचाव के लिए गर्म कपड़े वितरित करना, बच्चाें काे चाॅकलेट खिलाना शुरू किया। इस सेवा की जानकारी साथी छात्र-छात्राओं काे हुई ताे वे भी साथ जुड़ते गए। वर्तमान में 40 छात्र-छात्राएं इस संगठन से जुड़ चुके है। फीड भीलवाड़ा का संस्थापक ध्रुव चौधरी, सह संस्थापक जयंत हिंगोरानी और देशना सिसोदिया काे बनाया गया।

13 नवंबर को पंचवटी क्षेत्र में जरुरतमंदाें काे भाेजन करा पहली ड्राइव से सेवा का शुभारंभ किया, जाे 4 जनवरी तक 10वीं ड्राइव तक पहुंची है। इसके अलावा सर्दी से बचाव के लिए स्वेटर, जर्सी के साथ ही छाेटे बच्चाें काे चाॅकलेट के पैकेट भी वितरित किए जा रहे है।

भाेजन व कपड़ा वितरण के साथ पढ़ाने के लिए करते हैं प्रेरित
संगठन के ध्रुव चाैधरी का कहना है कि विभिन्न बस्तियाें में पहुंच जरुरतमंदाें काे भाेजन कराने व कपड़े वितरित करने के साथ ही सदस्य उनके बच्चाें काे पढ़ाने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। इसके लिए बच्चाें काे शिक्षण सामग्री अादि भी देने का भी भराेसा दिलाया है। संगठन के सदस्य शहर के ऐसे क्षेत्राें में पहुंचते हैं, जहां जरुरतमंद परिवार अधिक रहते हैं, जिन्हें अपना व बच्चाें का लालन-पालन में परेशानी हाेती है। ध्रुव के साथ ही देशना सिसाेदिया, जयंत हिंगोरानी, तुषार लड्ढा, क्षिप्रा दाधीच, क्षिप्रा विजयवर्गीय, भाविका सोनी, अपेक्षा जैन आदि सहयाेग कर रहे हैं।

बस्तियाें में तैयार भाेजन लेकर जाते हैं, स्वयं परोसते भी हैं
फीड भीलवाड़ा के सदस्य झुग्गी बस्तियों में तैयार भोजन लेकर पहुंचते हैं। पैकेट देने के बजाय वहां पत्तल लगाकर सभी बैठाकर भाेजन कराया जाता है। उसके बाद उनकी पत्तल भी सदस्याें द्वारा ही उठाकर क्षेत्रीय डस्टबिन में डाली जाती है।

दो माह पहले शुरू की गई इस सेवा काे लाेगाें द्वारा सराहा जा रहा है। 6 छात्र-छात्राओं द्वारा शुरू किए सेवा के इस काम में वर्तमान में 40 सदस्य सहयाेग कर रहे हैं। इनमें से 90% छात्र हैं, जो जरुरतमंदाें की आर्थिक दृष्टि के साथ ही बहुमूल्य समय भी दे रहे हैं।

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