पायलट गुट के 3 विधायकों के बागी तेवर की वजह: 4 सीटों पर उपचुनाव से पहले गहलोत पर दबाव बनाने की कोशिश; SC, ST और माइनॉरिटी से भेदभाव का मुद्दा इत्तेफाक भी नहीं


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जयपुर3 घंटे पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी

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  • स्पीकर से शुरू हुई नोकझोंक अब कांग्रेस के अंदरूनी घमासान में बदलती दिख रही

विधानसभा में एक विधायक को अपनी सीट के बजाय पीछे जाकर बोलने की बात पर स्पीकर से शुरू हुई नोकझोंक अब कांग्रेस के अंदरूनी घमासान में बदलती दिख रही है। कांग्रेस में एक बार फिर बगावत के सुर उठने लगे हैं। 4 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से पहले विधायक रमेश मीणा ने एससी, एसटी और माइनॉरिटी के विधायकों को सदन में बैठने की व्यवस्था पर सवाल उठाकर अब मुद्दे को राजनीतिक बना दिया है।

रमेश मीणा के साथ इस मुद्दे पर सचिन पायलट समर्थक विधायक मुरारी मीणा और वेद प्रकाश सोलंकी ने यह मुद्दा उठाया और रमेश मीणा के बयान का समर्थन किया। कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग इसे बगावत के संकेत के तौर पर देख रहा है। यह मुद्दा ऐसे वक्त उठा है जब 4 विधानसभा सीटों पर उपुचनाव होने हैं, ऐसे में इसके सियासी मायने हैं।

जिस तरह रमेश मीणा ने एससी, एसटी और माइनॉरिटी के साथ विधानसभा में बोलने से लेकर विकास के लिए बजट तक देने में भेदभाव के आरोप लगाए हैं उसे काफी गंभीर माना जा रहा है। रमेश मीणा के साथ दो और विधायक खुलकर इस मुद्दे को उठा चुके हैं। राजनीतिक जानकार इस घटनाक्रम को पायलट समर्थक विधायकों की नाराजगी से ज्यादा उनकी भविष्य की तैयारी से जोड़कर देख रहे हैं।

एससी-एसटी और माइनॉरिटी से भेदभाव का मुद्दा महज इत्तेफाक नहीं, भविष्य की तैयारी!
एससी, एसटी और मुस्लिम माइनॉरिटी कांग्रेस का पंरपरागत वोट बैंक होने की वजह से बैक-बोन है। पायलट समर्थक विधायकों ने इसी बैकबोन की भाावनाओं को उभारने का प्रयास किया है। इसे भविष्य की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। पायलट समर्थक जिन तीन विधायकों ने खुलकर मुद्दा उठाया है, उनमें से रमेश मीणा और मुरारी मीणा पहले बसपा से चुनाव लड़ चुके हैं। गहलोत के पिछले राज में दोनों कांग्रेस में आए थे। इसलिए इन नेताओं के लिए कांग्रेस से अलग राह चुनना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। सचिन पायलट खेमे के विधायकों को अगर नई पार्टी या मोर्चा बनाने की जरूरत पड़ी तो अभी की यह कवायद विधानसभा चुनाव में काम आ सकती है।

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एससी-एसटी और मुस्लिम माइनॉरिटी के कांग्रेस में अभी 37 विधायक
कांग्रेस में अभी एससी, एसटी और मुस्लिम माइनॉरिटी को मिलाकर 37 विधायक हैं। एसटी के 12, एससी के 18 और मुस्लिम माइनॉरिटी के 7 विधायक हैं। तीनों वर्गों का वोट जिधर जाता है सरकार उसकी बननी तय है। क्योंकि 125 से ज्यादा सीटों पर इनका प्रभाव माना जाता है। तीनों वर्ग पहले से ही उचित भागीदारी नहीं मिलने से नाराज हैं। कई मुस्लिम संगठन भी कांग्रेस सरकार से कई मुद्दों पर नाराज हैं। आदिवासी इलाकों में बीटीपी के प्रभाव और खेरवाड़ा के पास हुए आंदोलन के बाद नाराजगी बढ़ी है। एससी का वोट भी भीम आर्मी, बसपा सहित कई जगह डायवर्ट होना शुरू हो गया है।

मंत्रिमंडल विस्तार-राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सरकार पर दबाव की रणनीति
मौजूदा घटनाक्रम को मंत्रिमंडल विस्तार और सरकार में भागीदारी के लिए दबाव बनाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सचिन पायलट खेमे की बगावत के बाद हुई सुलह के बाद अब तक किसी को सरकार में भागीदारी नहीं दी है। पायलट के अलावा विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को बगावत के वक्त हटाया गया था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पायलट समर्थक विधायक मंत्रिमंडल विस्तार में देरी के साथ- साथ सरकार में काम नहीं होने से भी नाराज हैं। अब उपचुनाव से पहले खुलकर आवाज उठाने से दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है।

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