पहल: रिश्तों में जहर घोल रही थी शराब, झगड़े से तंग नौ गांवों ने एक ही दिन लागू कर दी शराबबंदी


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पालीएक घंटा पहले

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  • बाली उपखंड के आदिवासी क्षेत्र के गांव रोटियां फली में संयुक्त ग्रामसभा आयोजन समिति का गठन

प्रदेश के भरतपुर और भीलवाड़ा में पिछले दिनों जहरीली शराब से 12 लाेगाें की माैत हाे गई थी। वहीं इनके बीच अब पाली जिले के आदिवासी इलाके में 9 गांवों ने शराबबंदी लागू कर दी है। अब यहां पर शराब पीने वालों पर 500 से 5 हजार रुपए तक जुर्माने का नियम बना दिया है।

इन गांवाें में अब न तो हथकढ़ शराब बनती है और न कोई दूसरी शराब बिकती है। यह सब संभव हाे पाया राजस्थान पेसा एक्ट-2011 से। इस एक्ट का नियम-29 कहता है कि ग्राम सभाएं अपने क्षेत्र में शराब पर नियंत्रण करने के लिए शराबबंदी लागू कर सकती है। यहां तक कि आबकारी विभाग के ठेके काे भी ग्रामीण निर्णय लेकर बंद करा सकते हैं।

प्रदेश के दूसरे गांव भी चल पड़े शराबबंदी की राह पर

प्रदेश में तीन साल पहले राजसमंद के काछबली और भीम पंचायत समिति के मंडावर गांव में महिलाओं ने शराबबंदी की आवाज उठाई थी। इनकी मांग के आगे ग्राम पंचायत और प्रशासन काे झुकना पड़ा। इसके बाद शराबबंदी काे लेकर वाेटिंग कराई गई। दाेनाें जगह शराब की दुकानें बंद हुईं। बता दें कि ये गांव टीएसपी यानी आदिवासी इलाके नहीं हैं और इनमें पेसा एक्ट भी लागू नहीं हाेता।

वहीं प्रदेश के डूंगरपुर मेंं 172 गांवों में ग्राम सभाएं हैं। इनमें से करीब 80 में शराब नियंत्रण के लिए बनाए गए कानूनाें की सख्ती से पालना की जा रही है। इसी तरह उदयपुर के काेटड़ा क्षेत्र में पेसा एक्ट के तहत 124 ग्राम सभाएं बनी हुई हैं। इनमें से 40 ने शराब नियंत्रण के लिए कानून बना रखे हैं।

राेटिया फली में ग्रामीणों ने लगाया शिलालेख, आदिवासी महिलाओं ने शराबबंदी की ली शपथ

बाली उपखंड की ग्राम पंचायत रामपुरा के गांव रोटियां फली में गांव के लोगों ने प्रत्येक घर से चंदा एकत्रित करके शिलालेख तैयार किया है। यह लोग गांव की गांव सभा स्वयं चलाते हैं तथा गांव में शराबबंदी की शपथ भी ली है। उस गांव में कोई शराब पीता हो तो गांव की जाजम पर बैठकर गांव वाले पेनल्टी लगाते हैं तथा यह लोग गांव की सीमा के तहत आने वाले खनिज, पत्थर, लघु वन उपज आदि पर गांव का नियंत्रण इस गांव की पंचवर्षीय गांव विकास योजना स्वयं ग्रामीणों ने बनाई तथा पंचायत में जाकर जमा करवाई गई है। इसके लिए गांव में ग्रामसभा का गठन किया गया है। इसमें खास बात यह है कि सभा में महिलाओं काे ज्यादा तवज्जाे दी जाती है।

कुरका गांव में 2017 में गठित हुई सभा
काेयलवाव पंचायत के कुरका गांव में 2017 में सभा गठित हुई। अध्यक्ष गणेशराम ने बताया कि सभा में नियम बनाने के बाद अब न ताे गांव में काेई शराब पीता है और न ही बनाता है। हालांकि छूट दी गई है कि किसी के घर में सगाई हाे ताे सभा की अनुमति लेकर 5 बाेतल शराब उपयाेग में ले सकता है।

क्या हाेता है पेसा एक्ट

पेसा एक्ट के विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता व क्षेत्रीय समन्वयक गोडवाड़ आदिवासी संगठन बाली के वगताराम देवासी ने बताया कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1999, राजस्थान पेसा नियम 2011 के नियम 29 के तहत राजस्व ग्राम सभाएं गांव में संकल्प पारित कर शराबबंदी कर सकती है। नियम 30 के अनुसार महिलाओं के विचार निर्णायक माने जाएंगे। नियम 31 में काेई व्यक्ति पेसा क्षेत्र में निवास करता है और नियम के बाद भी वह शराब सेवन कर हुडदंग करता है ताे ग्रामसभा जुर्माना लगा सकती है।

पाली : 33 गांव टीएसपी में आते हैं
गाेडवाड़ आदिवासी संगठन बाली के संरक्षक वगता राम ने बताया कि पाली की 15 पंचायताें के 33 गांव टीएसपी क्षेत्र में आते हैं। इनमें से 9 में ग्राम सभाएं बनी हुई हैं। यहां पर शराबबंदी के लिए नियम बने हुए हैं।

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