नाकारा निगम: चांदशाह तकिया : चेन ऑफ टाइटल की जांच में खुल सकती है पोल, निमाज की हवेली: जर्जर व खतरनाक निर्माण को कब तोड़ेगा निगम


  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Jodhpur
  • Chandshah Pillow: Pole May Open In The Investigation Of Chain Of Title, Nimaz’s Mansion: When Will The Corporation Break The Shabby And Dangerous Construction

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

जोधपुर21 दिन पहले

  • कॉपी लिंक

चांदशाह तकिया के पास इस सात मंजिला बिल्डिंग के पांच फ्लोर कागजों में ही सीज हैं।

  • हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा सबसे पहले बनी इमारत को सीज करने के 7 साल बाद भी वही हालात जर्जर
  • गिराऊ इमारताें को मानसून के पहले सिर्फ नोटिस देने तक ही सिमट जाती है नगर निगम की कार्रवाई

हाईकोर्ट के पिछले 8-10 सालों से शहर में नियम विरुद्ध खड़ी हो रही हाइराइज इमारतों को लेकर बार-बार फटकार लगाने के बावजूद नगर निगम इसको लेकर गंभीर नहीं है। इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि सात साल पहले हाईकोर्ट द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी ने चांदशाह तकिया मार्केट के सामने बिना इजाजत बनी सात मंजिला इमारत को सीज करने के साथ भविष्य में ऐसे निर्माण नहीं होने को लेकर पाबंद किया था, लेकिन आज भी हालात वैसे ही हैं, क्योंकि गुरुवार रात जिस छह मंजिला इमारत में आग लगी, वह पूरी तरह से अवैध पाई गई।

ताजुब्ब की बात यह है कि यह इमारत नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी) के सभी नियमों को धता बताकर खड़ी की गई थी। निगम प्रशासन की ऐसी ही उदासीनता शहर के जर्जर इमारतों को लेकर नजर आती है। शहर के तंग इलाकों में खड़े व्यावसायिक शोरूमों में आग लगने के हादसे-दर-हादसे के बावजूद निगम उन पर प्रभावी रोक नहीं लगा पा रहा है। बड़ा सवाल यही है कि इस अग्नि हादसे के बाद निगम प्रशासन यह गारंटी दे पाएगा कि अब भविष्य में ऐसी अवैध हाइराइज इमारतें नहीं बनेगी और जो अवैध बन चुकी है, उन्हें बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप दुबारा से बनाने के लिए भवन मालिकों पाबंद किया जाएगा?

क्या निगम प्रशासन मोती चौक स्थित निमाज की हवेली के जर्जर व गिराऊ हिस्से के साथ-साथ शहर के अन्य इलाकों में जर्जर इमारतों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाएगा? हालांकि इन सभी मामलों में अफसरों ने तो अभी भी चुप्पी साध रखी है, लेकिन उत्तर व दक्षिण निगम की कमान संभालने वाली महिला महापौर ऐसे मामलों पर जल्द एक्शन लेने की बात कह रही हैं। निगम चेन ऑफ डॉक्यूमेंट्स जांचे तो कई इमारतें सरकारी जमीन पर खड़ी नजर आएंगी

चांदशाह तकिया मार्केट के सामने 6 मंजिला जूतों के शोरूम में भीषण आग के बाद इसके अवैध होने की बात का खुलासा तो हुआ है ही, लेकिन इसके समीप सात मंजिला इमारत के दो फ्लोर (पांच फ्लोर अवैध) को छोड़कर कागजों में सभी सीज ही हैं। वहीं अन्य इमारतें भी पूरी तरह से अवैध बनी हुई हैं। इन सभी इमारतों में सेटबैक व पार्किंग का कोई प्रावधान ही नहीं है, इसके बावजूद हमारा निगम इनकाे लेकर गंभीर नहीं है।

स्टेट सरकार के समय के जानकारों का मानना है कि अगर यहां काबिज भवन मालिकों के भू-स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों का व्यक्तिगत सर्वे कर उनके चेन ऑफ डाक्यूमेंट्स की जांच की जाए तो अधिकांश लोगों के सरकारी जमीन पर काबिज हाेने का खुलासा हो सकता है। महापौर (दक्षिण) वनिता सेठ ने कहा कि निगम ऐसी इमारतों को बनने ही नहीं दे और बन जाए ताे नियमानुसार कार्यवाही की जाए।

आगे क्या : जानकार बताते हैं कि चांदशाह तकिया की जितनी जमीन दान दी थी, उससे ज्यादा जमीन पर लोग काबिज हो गए। निगम इसकी जांच करे कि कितनी जमीन दान दी, इसके बाद कितने लोगों को यह जमीन बेच दी गई।

शहर में 50 से ज्यादा इमारतें जर्जर और गिराऊ हालत में, निगम इन्हें कब तोड़ेगा?

राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 धारा 243 के अंतर्गत शहर में जर्जर, गिराऊ व खतरनाक बन चुके भवनों को गिराने का अधिकार निगम को है। अधिकांश जर्जर भवन परकोटे के भीतर ही हैं, जो स्टेट सरकार या उससे पहले के बने हुए हैं। सवाल यह है कि क्या निगम हादसा होने तक कार्रवाई को टालता रहेगा?

पिछले 4-5 सालों में हुए सर्वे में 8-10 ऐसे भवन व हवेलियाें का जीर्णोद्धार हो चुका है, लेकिन 50-60 जर्जर भवनों को हर साल मानसून आने के पहले स्वेच्छा से सुरक्षित नहीं गिराने पर निगम की ओर से गिराने का अल्टीमेटम दिया जाता है, बाद में सभी नोटिस अगले मानसून तक फाइलों में बंद हो जाते हैं। निगम ने जर्जर भवनों को हटाने के बाद हर्जाना भी वसूला है, पर मोती चौक निमाज की हवेली में विवाद के बाद हाथ खींच लिए।

आगे क्या : एडीएम के पत्र के बाद इसको गिराने के लिए निगम सक्रिय हुआ, लेकिन विवाद होने पर आयुक्त रोहिताश्वसिंह तोमर ने हाथ खींच लिया। सवाल है कि निगम इस जर्जर हिस्से को हादसे के लिए यूं ही छोड़ देगा या फिर सुरक्षित उतारेगा? महापौर (उत्तर) कुंती देवड़ा ने कहा कि ऐसे जर्जर भवनों को अनदेखा नहीं कर सकते, लेकिन इसके पहले पूरे सिस्टम व नियमों में कार्रवाई निश्चित करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *