धरतीपुत्रों पर कुदरत का कहर: अन्नदाता के अरमान किए तहस नहस, दुखी किसान बोले-कैसे चुकेगा कर्ज


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कोटा13 मिनट पहले

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बारिश और ओलावृष्टि से इस कदर नुकसान हुआ है कि खराब फसलें मवेशियों के चारे के लायक तक नहीं बची हैं।

कनवास तहसील के मंगलपुरा निवासी रूपचंद खटाना के परिवार में 10 सदस्य हैं। सभी खेती पर आश्रित हैं। इस बार बड़े उम्मीद से चना व गेंहू की फसल की थी। लेकिन कुदरत के कहर ने सब तहस नहस कर दिया। शुक्रवार को हुई बारिश व ओलोवृष्टि में चने की फसल बह गई। रूपचंद ने बताया कि धाखड़खेड़ी में बैंक से 10 लाख का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लोन ले रखा हैं। करीब 3 लाख आढ़तिया व 4 लाख अन्य से कर्जा लेकर फसल की थी।उनके 30 बीघा में चने की फसल थी। जिसमें से 15 बीघा 8 हजार रुपये प्रति बीघा से किराए से जोई थी। जबकि बाकी जमीन में गेंहू किए थे। बारिश ने सब तबाह कर दिया। अभी तक खेत में पानी भरा हैं। अब चिंता सता रही है कि कर्ज कैसे चुकेगा?

बारिश ने सब तबाह कर दिया। अभी तक खेत में पानी भरा हैं। अब चिंता सता रही है कि कर्ज कैसे चुकेगा?

बारिश ने सब तबाह कर दिया। अभी तक खेत में पानी भरा हैं। अब चिंता सता रही है कि कर्ज कैसे चुकेगा?

राजाराम (60) निवासी खजुरना ने बड़े अरमानों से 32 बीघा जमीन में चना,लहसुन व गेंहू की फसल की थी। बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि ने एक झटके में राजाराम के अरमानों पर पानी फेर दिया। 15 बीघा में लगी चने की फसल,14 बीघा गेंहू व 4 बीघा में लहसुन की फसल टूट कर बिखर गई। राजाराम ने चना काट कर खेत में रखा था। उन्होंने 3 लाख का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) व 1 लाख का सहकारी से लोन ले रखा था। कुदरत के कहर ने उनकी 9 लाख की फसल पूरी तरह चौपट हो गई।हाल ही में उन्होंने 37 हजार का बिजली का बिल जमा करवाया था। परिवार में 6 सदस्य है। सभी खेती पर आश्रित हैं।

मवेशियों के चारे का संकट

राजाराम व रूपचंद तो बानगी हैं ऐसे कई किसान हैं जिनकी फसलें चौपट हुई हैं। कनवास और सांगोद उपखंड में तेज बारिश के साथ ओले गिरने से फसलों को भी नुकसान पहुंचा हैं। प्रकृति के कहर ने खजुरना, मंगलपुरा, कोटबावड़ी, उरना, मोहनपुरा, खोदयाखेड़ी, बालुहेड़ा,आवां, मांदल्याहेड़ी गांव में किसानों की कमर तोड़ दी हैं। अब इनके पास कुछ नहीं बचा है बारिश और ओलावृष्टि से इस कदर नुकसान हुआ है कि खराब फसलें मवेशियों के चारे के लायक तक नहीं बची हैं।

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