दरगाह का 809 वां उर्स: आशिकाने ख्वाजा का सैलाब उमड़ा; छोटे कुल की रस्म अदा, बंद किया जन्नती दरवाजा


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अजमेर15 मिनट पहले

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दरगाह में कुल की रस्म में शामिल दरगाह दीवान व अन्य

अजमेर में दरगाह के 809वें उर्स के छोटे कुल की रस्म शुक्रवार को शाहाना अंदाज में अदा की गई। तोप के गोले दागे गए, शादियाने बजाए गए। दरगाह दीवान की सदारत में कुल की महफिल हुई और उनके जन्नती दरवाजे से आस्ताना शरीफ में दाखिल होते ही यह दरवाजा बंद कर दिया गया। इस मौके पर आशिकाने ख्वाजा का सैलाब उमड़ पड़ा।

दरगाह में शुक्रवार सुबह से ही जायरीन का सैलाब उमड़ा हुआ था। आहाता ए नूर, आरकाट का दालान, अंजुमन दफ्तर के सामने वाला दालान, झालरा, शाहजहांनी मस्जिद परिसर, बाबा फरीद, महफिलखाना के सामने, बुलंद दरवाजे और अकबरी मस्जिद परिसर समेत सभी जगह जायरीन से अटे पड़े थे।

सुबह महफिल खाना में कुरान ख्वानी हुई। उसके बाद उर्स के कुल की महफिल की शुरुआत हुई। दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन अली खां ने महफिल की सदारत की। शाही कव्वाल असरार हुसैन और साथियों ने गरीब नवाज की शान में सूफियाना कलाम पेश किए। रंग बधावा पेश किया। महफिल खाना आशिकान ख्वाजा से भरा हुआ था। तोप के गोले दागे गए, शादियाने बजे और बड़े पीर साहब की पहाड़ी से तोप के गोले दागे जाने लगे।

कुल की रस्म में उमडे़ अकीदतमंद

कुल की रस्म में उमडे़ अकीदतमंद

दरगाह के शाहजहांनी गेट से मौरूसी अमले के सदस्य ढोल नगाड़े बजाने लगे और नौबत बजाई जाने लगी। दीवान आबेदीन व्हील चेयर पर महफिल खाना से जन्नती दरवाजे के लिए रवाना हुए। जन्नती दरवाजा पहुंचते ही वे व्हील चेयर से उठ गए और अंदर दाखिल हुए। दीवान आबेदीन के जन्नती दरवाजे में पहुंचते ही यह दरवाजा बंद कर दिया गया। दीवान ने आस्ताना शरीफ में कुल की रस्म अदा की। कुल की रस्म अदा करने के बाद दीवान महफिल खाना होते हुए खानकाह पहुंचे और मौरूसी अमले की दस्तारबंदी की।

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दरगाह में कुल के छींटे व मौजूद अकीदतमंद

दरगाह में कुल के छींटे व मौजूद अकीदतमंद

गुरुवार रात से ही दरगाह में कुल के छींटे शुरू

गरीब नवाज के उर्स में शरीक होने आए अकीदतमंद ने गुरुवार रात से ही दरगाह में कुल के छींटे शुरू कर दिए। मगरिब की नमाज के बाद रजब महीने की छह तारीख लग जाने को देखते हुए अकीदतमंद ने आस्ताना शरीफ की दरो दीवार को केवड़े व गुलाब जल से धोना शुरू कर दिया। अनेक अकीदतमंद इस पानी को बोतलों में भी बतौर तबर्रुक के ले गए। गुरूवार रात को दरगाह के महफिल खाना में उर्स की रात की आखरी महफिल दरगाह दीवान आबेदीन की सदारत में हुई। शाही कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश किए। मध्य रात्रि को दीवान आबेदीन ने मजार शरीफ को केवड़े व गुलाब जल से गुस्ल दिया।

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