दयालपुरा हत्याकांड में खुलासा: गालियों से तंग बहू ने ससुर को खाने में जहर खिलाया, अचेत होने के बाद बेटे ने सिर पर वार किए, तेल छिड़क जला डाला


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पाली4 मिनट पहले

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पाली में 8 मार्च को प्रदर्शन के दौरान हाथ जोड़ता ओमाराम। फाइल फोटो

  • खाने में जहर मिला बोली बहू- मैंने अपना काम किया, अब तुम्हारी बारी
  • हत्या के बाद बेटा बोला- मैंने भी मेरा काम पूरा किया

दयालपुरा गांव के बहुचर्चित मांगीलाल बंजारा की निर्मम हत्या के पीछे की कहानी खाैफनाक है ताे तरीका ए वारदात काफी वहशियाना भरा है। हत्या की साजिश बेटे ओमराम बंजारा व बहू संताेष ने मिलकर रची, लेकिन उसे अंजाम देने में दाेनाें का किरदार अलग था। केस में तफ्तीश और आराेपी बेटे-बहू के कबूलनामे से जाे क्राइम सीन सामने आया, वह दिल दहलाने वाला है।

पुलिस जांच में पता चला है कि घटना वाले दिन 16 फरवरी काे आराेपी संताेष ने अपने ससुर मांगीलाल के लिए अलग खाना बनाया था। आटे में जहर मिला पांच राेटियां बनाई और सब्जी में भी जहर मिलाया और टिफिन तैयार कर ससुर काे दे दिया। साेची-समझी साजिश के अनुसार शाम काे जब ओमाराम घर लाैटा ताे संताेष ने कहा कि मैंने अपना काम कर दिया, अब तुम्हारी बारी है।

ओमाराम काे लगा कि पाेस्टमार्टम रिपाेर्ट में जहर की पुष्टि होने पर पुलिस उन दाेनाें पर संदेह कर सकती है। इसलिए वह रात 10 बजे एक बाेतल व खाली पव्वाें में रायड़े का तेल लेकर खेत पर ले गया। वहां मांगीलाल अचेत पड़ा था।

आराेपी ने किसी ठाेस चीज, संभवत: डंडे या लकड़ी से उसके सिर पर वार किए। इसके बाद पेट पर तेल उड़ेल आग लगा दी, जिससे पेट वाला हिस्सा बुरी तरह से जल गया। इसके बाद वह घर पहुंचा और पत्नी काे कहा-चिंता मत कराे, मैंने भी मेरा काम कर दिया।

पुलिस, परिवार व समाज काे किया गुमराह

परिवार: वारदात के बाद घर आकर साे गया और दूसरे दिन सुबह मजदूरी पर जाने का कह घर से निकला, ताकि परिवार काे संदेह नहीं हाे। गुपचुप तरीके से मृतक के खाने का टिफिन, शराब के खाली पव्वे व अन्य सामान खेत से कुछ दूरी पर जंगल में फेंके। दूसरे दिन पिता की खाेजबीन का नाटक किया और छाेटी बहन काे साथ ले गया। माैके पर दहाड़े मारकर राेने का नाटक किया। कुछ लाेगाें पर आराेप लगा परिवार काे साथ किया।

समाज: आराेपी आक्रामकता के साथ हत्या का दाेष गांव के कुछ लाेगाें पर मढ़ता रहा। साेशल मीडिया पर समाज काे गुमराह करते हुए घटनास्थल पर अधजले शव व खुद के विलाप करते हुए वीडियाे व फाेटाे वायरल कर समाज से समर्थन मांगा। तीन बार समाज के लाेगाें के साथ एसपी-कलेक्टर काे ज्ञापन देते हुए खुद आगे रहा। 8 मार्च काे धरना प्रदर्शन में हाथा-जाेड़ी कर समाज से सहयाेग मांग सहानुभूति जुटाई।

पुलिस: खुद पर पिता की हत्या के शक गहराया ताे आराेपियाें काे पकड़ने के बजाय परिवार काे परेशान करने के आराेप लगाए। पुलिस ने मृतक का टिफिन व अन्य सामान घटनास्थल से दूर मिलने व कुत्ते की माैत जहर से हाेने के तथ्य में पूछताछ की ताे वह यही कहता था कि मेरे फिंगर प्रिंट ले लाे। उसे पता था कि उसके फिंगर प्रिंट मैच नहीं हाेंगे। वह हर बार यही कहता था कि बहन के साथ गया था, ताकि बहन के बयान से बच जाए।

यह हत्याकांड ऐसे रिश्ताें का झकझोर देने वाला उदाहरण

परिवार एक हरे-भरे विशाल वृक्ष की भांति है, जिस पर उल्लास की तरह फूल खिलते हैं। हावी हाेते मनाेविकार एवं सुन्न हाेते रिश्ते एक ऐसा भीषण राेग है, जिसकी गिरफ्त में आने के बाद परिवार रूपी वृक्ष खड़ा नहीं रह सकता। मांगीलाल बंजारा हत्याकांड भी ऐसे रिश्ताें का दुखद उदाहरण है। मैंने कई ब्लाइंड मर्डर काे ट्रेसआउट कर हत्याराें काे पकड़ा, लेकिन इस हत्याकांड ने सामाजिक रिश्ताें काे हिलाकर रख दिया। काश, ऐसा कभी भी किसी के साथ नहीं हाे।

-कालूराम रावत, एसपी, पाली

7 टीम में 43 अधिकारी- कर्मचारी, हर टीम काे टास्क

​​​​​​​एसपी कालूराम रावत ने एएसपी डाॅ. तेजपाल सिंह व सीओ ग्रामीण श्रवणदास के सुपरिवजन में सात टीमाें का गठन कर हर टीम काे अलग-अलग टास्क दिया। सदर थाना प्रभारी भंवरलाल पटेल, देसूरी एसएचओ सुरेश चाैधरी, औद्याेगिक थाना प्रभारी सवाईसिंह राठाैड़, साेजत एसएचओ रामेश्वरलाल भाटी, राेहट एसएचओ जसवंतसिंह राजपुराेहित, जिला विशेष टीम प्रभारी चंद्रसिंह भाटी व सदर की उप निरीक्षक संजना बेनीवाल समेत टीम में 43 अधिकारी-कर्मचारियाें काे शामिल किया गया।

दूसरे दिन बहन के साथ माैके पर पहुंचा, राेने का नाटक किया

दोनों ने हत्याकांड काे 16 फरवरी काे अंजाम दिया। दूसरे दिन 17 फरवरी की शाम काे ओमाराम अपनी छाेटी बहन के साथ पिता की खाेजबीन करने का नाटक करते हुए खेत पर पहुंचा। वहां शव देख राेने का नाटक किया। ग्रामीण व अन्य परिजन भी विलाप करने लगे ताे ओमाराम ने पिता के हत्याराें काे गालियां भी दी।

घटनास्थल पर उसने किसी की मदद से इसका वीडियाे बनाकर साेशल मीडिया पर वायरल भी करा दिया। उल्लेखनीय है कि मृतक की चार बेटियां और दाे पुत्र हैं। तीन बेटियाें की शादी हाे चुकी है, जबकि सबसे छाेटी स्कूल में पढ़ती है। छाेटा बेटा अशाेक अपने भाई ओमाराम के साथ मकान निर्माण पर छीणे चढ़ाने की मजदूरी करता है।

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