जोधपुर: नहीं रहे जोधपुर के तीसरे महापौर शिवलाल टाक, 99 वर्ष की आयु में हुआ निधन, आज होगा अंतिम संस्कार


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जोधपुर17 मिनट पहले

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शिवलाल टाक।

  • वर्ष 1999 में महापौर व वर्ष 1964 में नगर परिषद के सभापति रहे थे टाक

नगर निगम के तीसरे महापौर रहे शिवलाल टाक का गुरुवार को निधन हो गया। वे 99 साल के थे। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार शाम 4 बजे सिवांची गेट स्थित श्मशान घाट पर होगा। वे 1999 में सरदारपुरा क्षेत्र के वार्ड से चुनाव जीते और महापौर बने। इसके पहले वे 1964 में नगरपरिषद चुनाव जीतने पर सभापति बने थे। इसके बाद वर्ष 1981-84 तक नगरपालिका में पार्षद रहे।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पिता स्व. बाबू लक्ष्मण सिंह से शिवलाल टाक की गहरी दोस्ती थी। यहीं कारम रहा कि गहलोत ने उन्हें हमेश पितातुल्य सम्मान दिया। वर्ष 1964 में नगर परिषद का चुनाव जीते तो उन्हें सभापति बनाया था, तब सीएम गहलोत के पिता स्व. बाबू लक्ष्मणसिंह गहलोत उप सभापति थे। उनकी सरलता, सहजता व ईमानदारी के चलते उन्होंने जब पार्षद का चुनाव लड़ा तो भाजपा ने अपना उम्मीदवार ही नहीं उतारा। वर्ष 1999 में कांग्रेस बोर्ड में महापौर चयन की बात सामने आई तो गहलोत ने सबसे पहले शिवलाल टाक का नाम आगे किया। सादगी से जीवन जीने वाले टाक कभी किसी विवाद में नहीं उलझे। सत्ता व विपक्ष से उन्हें हमेशा पूरा सम्मान मिला।

वे खुद बेहतरीन काॅन्ट्रैक्टर रहे तो उन्हें शहर के विकास को लेकर लगाव रहा। निगम के पहले महापौर डॉ. खेतलखानी का भी गत वर्ष 27 दिसंबर को शतायु में निधन हो गया था। पॉलीटेक्निक कॉलेज परिसर में निगम के नए भवन के लिए शिवलाल टाक जिद पर उतर गए थे। कलेक्टर से जमीन आवंटित होने बाद 11 साल पहले निगम के नए भवन के निर्माण के लिए 8 करोड़ की जरूरत पड़ी तो सरकार ने इनकार कर दिया। हालांकि तब प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी व अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री थे। गहलोत के कारण ही टाक महापौर बने थे, लेकिन निगम की तंगहाली देख सरकार ने बैंक गारंटी नहीं दी, लेकिन उन्होंने ठान लिया कि वे निगम का नया भवन बनाकर ही रहेंगे। तब पूरी डिजाइन तैयार करवाई व निर्माण अपने निर्देशन में पूरा करवाया। विधानसभा तर्ज पर बनाए सभाकक्ष में 100 से अधिक पार्षदों की बैठक क्षमता तय की। यह टाक की दूरदर्शिता का ही परिणाम था। आज उत्तर व दक्षिण निगम इसी आलीशान भवन में संचालित हो रहे हैं।

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