जीव जंतुओं के संरक्षण: पक्षियों से प्रेम ऐसा कि वेस्ट डिब्बों से घर पर ही बना दिए घरोंदे, किचन गार्डन भी बनाया


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बांसवाड़ा2 घंटे पहले

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  • क्रिएटिव आइडिया से सेवा के साथ-साथ घर काे भी बनाया आकर्षक

वैसे ताे पर्यावरण और जीव जंतुओं के संरक्षण के लिए लाेग बाग पाैधराेपण, परिंडे बांधना, सकाेरे बांटने जैसे सामाजिक सराेकार के कार्य करते हैं। लेकिन शहर के अमरदीप नगर रहने वाले मनीष शर्मा ने ताे अपने इस प्रकृति और पक्षी प्रेम में अपनी क्रिएटिविटी और आइडियाज काे जाेड़कर नया प्रयोग किया है। जिससे घर ताे सुंदर लगता ही है, बल्कि पशु पक्षी भी स्वत: वहां पहुंचकर अपना आशियाना बनाने लगे हैं। मनीष के बीते तीन सालों की इस मेहनत प्रयोग का नतीजा यह है कि दूसरे लाेगाें ने भी अपने अपने घरों में परिदाें के संरक्षण के लिए आशियानें बनाना शुरू कर दिया है। भास्कर से बातचीत में मनीष ने बताया कि पेड़ पाैधे लगाने का ताे उन्हें बचपन से शाैक रहा है। इसके लिए पुराने घर पर बगीचे और पाैधे ताे बहुत लगाए। 3 साल पहले अगरपुरा में नए घर में शिफ्ट हुए ताे वहां पर किचन गार्डन तैयार किया। जिसमें विविध प्रकार की सब्जियां और फल उगाने शुरू किए। इससे दिन की रोजमर्रा की अ‌ाधी जरूरतें ताे घर से ही पूरी हाे जाती है। इस किचन गार्डन की बदौलत ही यहां धीरे धीरे चिड़ियां और अन्य पक्षी भी धीरे धीरे आने लगे।

ऐसे घरोंदे बनाए कि पक्षी उनमें खुद आकर रहने लगे

घर के पीछे झाड़ियां उगी तो मनीष काट लेते, लेकिन जैसे जैसे पक्षियों की संख्या बढ़ने लगी ताे झाडिय़ां कटवाना बंद कर दिया। इस कारण हर रोज 500 से 1000 के करीब पक्षी घर के आसपास डेरा डाले रहते हैं। सुबह उनकी चहचहाहट काफी अच्छी लगती है। घर में दाे गार्डन भी बनाए हैं। 700 गमले हैं। मिट्टी में नमी के कारण कई चिडिय़ां उन्हें गमलों में घोसला बनाकर अंडे देती है ताकि सुरक्षित रहे। 40 घाैसले झाेपड़ी नुमा आकृति और पुराने टायर और बाेतलाें का उपयोग कर बनाए हैं।

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