गाेल्ड पर छिड़ा है ओल्ड विवाद: उदयपुर कलेक्टर के ऑफिस की तिजाेरी में रखा है सोना, 56 साल से चल रहा विवाद, पांच बार अलग-अलग कोर्ट से आ चुका फैसला


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उदयपुर4 मिनट पहले

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  • 56 साल पहले पूर्व पीएम शास्त्री का निधन, तौलने को लाए 57 किलो सोना रखा रह गया, तब कीमत 5 लाख थी, अब 27 करोड़ रु., कोर्ट बोला- सरकार मालिक

56 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री काे तौलने के लिए चित्ताैड़गढ़ कलेक्टर के पास रखा 56.863 किलाे साेना सरकार का है। बुधवार काे जिला एवं सेशन काेर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया कि साेना सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) असिस्टेंट आयुक्त के सुपुर्द कर दिया जाए। 56 साल पहले 4 लाख 76 हजार 272 रुपए का यह साेना आज 27 कराेड़ 29 लाख 42 हजार 400 रुपए का है। इस मामले में अलग-अलग पांच काेर्ट में पांच बार सुनवाई हाे चुकी है और हर बार सरकार के पक्ष में ही फैसला हुआ है।

इसके बावजूद अपील के चलते ना केस खत्म हुआ और ना सरकार काे अब तक साेने की सुपुर्दगी मिली है। अभी यह साेना उदयपुर कलेक्टर के ऑफिस की तिजाेरी में पड़ा है। बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री का ताशकंद में निधन हाेने से वह चित्ताैड़गढ़ नहीं आ पाए थे और साेना विवादों में फंस गया। मामले में सीजीएसटी की तरफ से स्टैंडिंग कैंसिल डाॅ. प्रवीण खंडेलवाल ने पैरवी की।

जिसने स्वागत के लिए पैसा जुटाया, उसने 1966 में लगाया था सोने के बदले बॉण्ड देने का आवेदन, तभी से विवाद

दरअसल, 5 अगस्त 2020 काे गोवर्धन आंजना ने सीजीएसटी असिस्टेंट आयुक्त, इनकम टैक्स ऑफिसर के खिलाफ अपील की थी। इसमें कहा था कि पिता गणपत आंजना ने 16 दिसंबर 1965 काे 56.863 किलाे साेना पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री काे ताैलने के लिए चित्ताैड़गढ़ कलेक्टर काे सुपुर्द किया था।

इंडिया डिफेंस एक्ट 1992 के रूल 26एच के अनुसार साेना या आभूषण काेई व्यक्ति सरकार में जमा कराएगा ताे उससे नहीं पूछा जाएगा कि कहां से लाया है। पिता ने साेने के बदले बॉण्ड प्राप्त करने के लिए 26 फरवरी 1966 काे चित्ताैड़गढ़ कलेक्टर काे प्रार्थना पत्र पेश किया था।

उसी समय पूर्व पीएम शास्त्री का निधन हाे गया, जिससे जमा कराए गोल्ड से ताैल नहीं पाए। इधर, साठगांठ कर एफआईआर दर्ज कराई, जिससे बॉण्ड की कार्रवाई राेक दी जाए। न्यायालय ने गणपत आंजना काे दाेष मुक्त किया। इनकम टैक्स ने गणपत काे साेने का स्वामी मानते हुए टैक्स जमा कराने के लिए नोटिस जारी किए, अंतिम नोटिस 11 मार्च 2020 काे भेजा गया। इसके अलावा अन्य पहलू रखते हुए लाेअर काेर्ट के आदेश पर स्टे का निवेदन किया, लेकिन काेर्ट ने सुनवाई कर सीजीएसटी काे साेना देने के आदेश दिए।

तीन पक्षकार और पांच काेर्ट, हर बार सरकार के पक्ष में फैसला
साेने मामले में तीन पक्षकार केन्द्र सरकार, चित्ताैड़गढ़ छाेटी सादड़ी गाेमाना के गणपत आंजना और गुणवंत लाल हैं, जाे मामले काे लेकर सीजेएम काेर्ट से हाई काेर्ट तक ले गए और फिर से लाेअर काेर्ट से सुनवाई शुरू हाे गई। पांच काेर्ट से पांच बार आए फैसले में हर बार केन्द्र सरकार यानी सीजीएसटी असिस्टेंट आयुक्त काे काेर्ट से साेना सौंपने के आदेश हुए हैं।

मामले में यह साफ नहीं कि साेना कहां से आया, चर्चाएं-खुदाई में निकला था

काेर्ट में पेश सभी रिकॉर्ड में कहीं भी यह नहीं है कि यह साेना आया कहां से है। इंडिया डिफेंस एक्ट 1992 के रूल 26एच में पूछा भी नहीं गया, लेकिन चर्चाएं काफी हुईं कि यह खुदाई के दाैरान निकला साेना है।

अब किसके पास क्या ऑप्शन

  • गोवर्धन इस सेशन काेर्ट के फैसले काे हाई कोर्ट में चुनौती दे सकता है। वहीं, हाई काेर्ट में वर्ष 2012 में दायर रीट पिटीशन का फैसला आना भी बाकी है।
  • अपील नहीं हुई और अपील हाेने के बाद भी सरकार के पक्ष में फैसला आया ताे साेना रिजर्व बैंक में जमा हाे सकता है। पक्षकारों के पास 30 दिन अपील का समय है।​​​​​​​

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