कोरोना टीकाकरण: कोरोना पर 106 व 105 साल की सुरजीत


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श्रीगंगानगर5 मिनट पहले

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  • 12 हजार से ज्यादा महिलाओं ने लगवाई कोरोना वैक्सीन, सभी स्वस्थ, देश की सबसे बुजुर्ग महिलाएं भी हमारे जिले की, जिनकी बदौलत बदला कोविड सॉफ्टवेयर…पढ़िए इनके अनुभव

कोरोना टीकाकरण का एक मार्च से तीसरा अभियान शुरू होने के बाद जिले में 30821 लोग टीकाकरण करवा चुके हैं। इनमें 12 हजार से ज्यादा महिलाएं हैं, जिन्होंने कोराेना को हराने का हौसला दिखाया है। इसमें जिले के दो ऐसे नायाब उदाहरण भी हैं, जिसमें एक 106 साल की सुरजीत कौर निवासी गांव 4एनएन और दूसरी इन्हीं की हमनाम सूरतगढ़ निवासी 105 साल की सुरजीत कौर। दोनों महिलाएं टीकाकरण करवाने के लिए दूसरे दिन पहुंची। जिन्होंने कोरोना के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया। इन दोनों की पहल के बाद ही 100 पार के बुजुर्गों के वैक्सीन की राह खुली।

सुरजीत कौर, उम्र 106; 7 दिन बाद भी मैं पूरी तरह स्वस्थ, अब तो मैं बेटे के पास इंग्लैंड भी जा सकूंगी

उम्र के लिहाज से भले ही शतक पूरा कर लिया। वृद्धावस्था की वजह से अब शरीर भले ही कमजाेर है। फिर भी जिले के गांव 4 एनएन की सुरजीत कौर का कोरोना का हराने का जज्बा बरकरार है। एक जनवरी 1915 को जन्मी सुरजीत कौर पत्नी मलकीत सिंह एक मार्च को टीकाकरण अभियान के तीसरे चरण के पहले दिन ही कोरोना रोधी दवा की डोज लगवाने पहुंचीं। कोविन एप में उम्र की फीडिंग में दिक्कत आई तो दूसरे दिन टीकाकरण हो सका।

सुरजीत कौर के अनुसार वैक्सीन करवाए 7 दिन हो चुके, अब तक पूरी तरह स्वस्थ हूं। न कोई घबराहट हुई और न ही बुखार आया। मैं तो अब इंग्लैंड में निवास कर रहे अपने बेटे सुखदेव सिंह के पास जाना चाहती हूं। वहां पौतों-पड़पौतों के साथ रहूंगी। मेर अनुभव कहता है, कोरोना हराने के लिए हर नागरिक को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। मैं उम्रदराज लोगों से कहूंगी कि आप भी टीकाकरण जरूर करवाएं। इसका कोई नुकसान नहीं, बल्कि फायदे ही हैं। हमें अब भी सावधानी यह रखनी है कि कोरोना की गाइडलाइन का ध्यान रखना है। मास्क भी पहनना ही है।

सुरजीत कौर, उम्र 105; मैं स्वस्थ, सभी लोग यह वैक्सीन जरूर लगवाएं, कोरोना नेड़े नहीं आऊ

सुरजीत कौर का कहना है, भारत-पाकिस्तान के बंटवारे का दर्द मैंने देखा है। लाशें देखी हैं। बटंवारे से पूर्व परिवार पाकिस्तान के बहावलपुर में रहता था। मैंने तीन संकट देखे हैं। बचपन में महामारी का नाम सुना था, जिसमें लोग किसी अज्ञात बीमारी से मर जाते थे। अब ढलती उम्र में कोरोना जैसी महामारी देखी है, जिसकी चपेट में पूरी दुनिया आई। बातचीत में 105 वर्षीय सुरजीत कौर पत्नी स्वर्ण सिंह का कोरोना को हराने का हौसला भी खूब दिखा।

कहा- मैं तो 2 मार्च को पैदल ही शहर की सीएचसी पर पहुंच गईं, जहां कोरोना टीकाकरण हो रहा था। वहां कतार में सबसे आगे खड़ी हुई। फिर बिना झिझक हंसते हुए कोरोना टीका लगवाया और आधा घंटे तक टीकाकरण केंद्र के आब्जर्वेशन रूम में समय भी बिताया। अस्पताल स्टाफ ने जब बताया, माता टीका लग गया, तब सुरजीतकौर हंस कर बोलीं -हुण तां कोरोना नेड़े नहीं आऊ। आसपास बैठे बुजुर्गों को इशारा करते हुए बोली, आप भी टीका लगवाओ कोई तकलीफ नहीं होती और न कोरोना होगा। उन्हाेंने कहा मुझे कोराेना टीकाकरण करवाए सात दिन हो चुके हैं और अभी एकदम स्वस्थ हूं। सभी को यह जरूर लगवाना चाहिए।

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