कैलाश मानसराेवर: वहां कण-कण में भगवान शिव, 28 दिन में यात्रा पूरी कर पर्वत की 55 किमी.परिक्रमा भी की


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श्रीगंगानगर3 मिनट पहले

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  • आज शिवरात्रि पर कैलाश यात्रा कर चुके 2 शिव भक्तों के अनुभव जानिए, प्राचीन शिवालय में सुबह 4 बजे महाआरती

जिलेभर में गुरुवार काे महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाएगा। आज हम आपकाे दाे ऐसे श्रद्धालुओं से रू-ब-रू करवा रहे हैं जिन्हाेंने अपने जीवन में कभी कैलाश मानसराेवर की कठिन यात्रा काे पूरा करने के बारे में साेचा नहीं था। शहर के रहने वाले महेश शर्मा व दलीप गहलाेत ने प्राचीन शिवालय के महंत कैलाशनाथ के साथ यात्रा कर कैलाश मानसराेवर के न केवल दर्शन किए बल्कि मानसराेवर में स्नान भी किया। महंत कैलाशनाथ ने बताया कि प्राचीन शिवालय में सुबह 4 बजे महाआरती का आयोजन किया जाएगा।

शिव भक्त बोले- दिल्ली में जांच, फिर कोठगोदाम पहुंचे, वहां से कैलाश मानसरोवर पहुंचे

^मैंने 2019 में महंत कैलाशनाथ के साथ कैलाश मानसराेवर की यात्रा शुरू की थी। इस यात्रा काे पूरा करने में हमें 28 दिन का समय लगा था। यात्रा पर जाने से पहले शहर से हम दाे लाेग ही रवाना हुए थे। यात्रा के दाैरान हमें 9 दिन चाइना में बिताने पड़े। हम यात्रा सुबह ही करते थे और रात में आराम करते थे। इस दाैरान बारिश भी हमारे कैंप के अंदर आने के बाद ही शुरू हाेती थी। अंत में हमने कैलाश मानसराेवर के दर्शन किए और स्नान भी किया। मैंने कभी नहीं साेचा था कि मैं इस जीवन में कैलाश मानसराेवर के दर्शन कर सकूंगा। महेश शर्मा

^कैलाश मानसराेवर जाने से पहले कई सवाल थे। यात्रा की कठिनाइयों काे लेकर अनजाना भय भी था। लेकिन उस धरा पर सब दिव्य हाेने की अनुभूति है। मैं वहां प्रत्येक पल शिव के अहसास से राेमांचित रहा। मैंने 2015 में महंत कैलाशनाथ के साथ यात्रा की शुरुआत की थी। हमने इस यात्रा काे 28 दिन में पूरा किया था। सबसे पहले हमारा दिल्ली के हाॅस्पिटल में मेडिकल चेकअप हुआ। इसके बाद हम बस से काठगोदाम पहुंचे। यहां से हम नारायण आश्रम हाेते हुए कैलाश मानसराेवर पहुंचे। कैलाश पर्वत की 55 किलाेमीटर की परिक्रमा कर पुण्य के भागी भी बने। दलीप गहलाेत

पूजा का यह रहेगा समय

प्रथम प्रहर : 11 मार्च शाम 06:48 बजे से रात 09:58 बजे तक। द्वितीय प्रहर : 11 मार्च रात 09:58 बजे से 01:08 बजे तक । तृतीय प्रहर : 11-12 मार्च की रात 01:08 बजे से अलसुबह 04:18 बजे तक। चतुर्थप्रहर : 12 मार्च की अलसुबह 04:18 बजे से सुबह 07:28 बजे तक।

यह है पूजन विधि

आसन पर पूर्वामुखी या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं। पूजन सामग्री पूर्ण रख लें। भगवान शिव को पंचामृत से स्नान करवाएं। उसके बाद शुद्ध जल से पुन: स्नान करवाएं। केसर-चंदन का तिलक लगाएं। उपवस्त्र, यज्ञोपवीत, सुगंधित द्रव्य, बिल्व पत्र और ऋतु फल अर्पित करें।

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