किसान आंदोलन में लोकदल की सक्रियता से भाजपा चिंतित: काउंटर के लिए जाट लीडरों को मैदान में उतारेगी, बताएंगे कृषि कानूनों के फायदे, मैन टू मैन होगी बात


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भरतपुर2 मिनट पहले

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किसान आंदोलन में लोकदल की सक्रियता से भाजपा चिंतित है। डर है कि जाट बहुल इलाकों में लोकदल फिर से घुसपैठ नहीं कर ले। इसलिए भाजपा ने काउंटर करना तय किया है। इसके लिए भाजपा ने जाट लीडरों को मैदान में उतारना तय किया है। जाट लीडर चौपाल और छोटी मीटिंग के जरिए किसानों से मैन टू मैन बात करेंगे और कृषि कानूनों की अच्छाइयों और उससे होने वाले फायदों को बताएंगे।

इस संबंध में पार्टी कृषि कानूनों का लिटरेचर आजकल में भेज देगी और इसका समन्वय प्रदेश स्तर पर किया जाएगा। बाद में बड़ी मीटिंग भी कराई जाएंगी, जिसमें भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चाहर, कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी सहित बड़े जाट नेताओं को भेजा जाएगा।

इस तरह का कार्यक्रम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे जुड़े इलाकों में करना तय किया गया है क्योंकि इन इलाकों में जाट मतदाता बड़े पैमाने पर हैं, जिन पर हाल के आंदोलन से भारतीय किसान यूनियन और लोकदल का प्रभाव बढ़ा है। इसकी काट के लिए भाजपा ने जाट नेताओं को फील्ड उतारना तय किया है।

इस संबंध में गत दिवस दिल्ली में भाजपा की ओर से मीटिंग का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी, प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया सहित 100 से ज्यादा जाट नेता शामिल हुए। इसमें संभाग से जिलाध्यक्ष डॉ. शैलेश सिंह, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष मोहन रारह, अरविंदपाल सिंह, करौली के धर्मा डागुर आदि ने भाग लिया।

यह मीटिंग बिना किसी प्रचार-प्रसार के की गई, जिसमें कहा गया कि किसान आंदोलन के जरिए विपक्ष और कम्युनिस्टों ने यह चौथी बार भाजपा और मोदी सरकार पर बड़ा हमला किया है। किसानों में कृषि कानूनों को लेकर भ्रम फैला दिया है जिसे साफ करना है।

इधर, जिलाध्यक्ष शैलेश सिंह ने कहा कि संगठनात्मक मीटिंग थी। कृषि कानून किसानों के हित में है। विक्षप और वामपंथी बरगला रहे हैं। कृषि कानून की खूबियां और अच्छाइयों को बताने के लिए पार्टी के निर्देशानुसार किसानों के बीच जाएंगे।

समर्थन मूल्य कायम रहेगा
भाजपा सूत्रों के मुताबिक दिल्ली मीटिंग में कहा गया है कि मोदी सरकार ने किसानों के हित में पहली बार बहुत बड़ा निर्णय लिया है। विपक्ष ने सोशल मीडिया के जरिए यह भ्रम फैला दिया है कि नए कानून से सरकारी समर्थन मूल्य समाप्त कर दिया जाएगा।

मीटिंग में जाट लीडरों को विश्वास दिलाया गया कि वे दावे के साथ कहें कि एमएसपी लागू है और रहेगी। साथ ही सरकार समय-समय पर बढ़ोत्तरी करेगी। साथ ही मोदी सरकार द्वारा किसानों के पक्ष में लिए गए निर्णयों और फायदों की भी जानकारी देंगे।

क्यों…एनसीआर और आसपास की 400 सीटे प्रभावित
जानकारों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे सटे इलाकों में करीब 55 लोकसभा और 400 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें जाट वोटर प्रभावी स्थिति मेें हैं। इन पर पिछले दो दशक में भाजपा ने उल्लेखनीय पकड़ बनाई है। करीब 70 फीसदी वोट भाजपा को मिलता रहा है।

मसलन, पूर्वी राजस्थान में भरतपुर, डीग-कुम्हेर, नदबई, वैर, हिंडौन, गंगापुर सिटी की सीटों पर जाट वोटर निर्णायक है। इसी प्रकार नगर और धौलपुर सीट पर भी जाट मतदाता प्रभाव डालते हैं। इसलिए लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी लगातार बृज क्षेत्र, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में लगातार दौरा और सभाएं कर रहे हैं।

(रिपोर्ट: प्रमोद कल्याण)

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