किसानों पर बड़ी मुसीबत: श्रीगंगानगर से रावला तक पानी बंद; 2.45 लाख हेक्टेयर में 1940 करोड़ रुपए के गेहूं पर संकट, किसान आंदोलित


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श्रीगंगानगर2 मिनट पहले

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  • आईजीएनपी में कल से सिंचाई पानी बंद, गंगकैनाल की नहरों में उतार-चढ़ाव

जिले के 5 लाख किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। आईजीएनपी में रविवार से सिंचाई पानी की आपूर्ति बंद हो जाएगी, जबकि गंगनहर में भी कई दिनों से पानी में उतार-चढ़ाव चल रहा है। जिससे किसानों की बारियां सूखी जा रही हैं। लिहाजा अब गंगनहर के किसान जहां पूरे पानी के लिए आंदोलन कर रहे हैं, वहीं आईजीएनपी में एक अतिरिक्त पानी के लिए किसानों ने शुक्रवार को अफसरों को चार घंटे तक बंधक बनाए रखा। कमाेबेश यही स्थिति भाखड़ा क्षेत्र की भी है। किसानाें काे आशंका है कि पानी नहीं मिलने से गेहूं की फसल बर्बाद हाे जाएगी।

अलबत्ता जिलेभर में सिंचाई पानी की किल्लत के चलते करीब ढाई लाख हेक्टेयर में खड़ी 1940 करोड़ की गेहूं की फसल पर संकट खड़ा हो गया है। डिमांड के अनुसार किसानों को पानी की एक और बारी मिले तो गेहूं की फसल बच सकती है। जिले में इस बार 2 लाख 45 हजार 611 हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई है।

पंजाब की नहर में 24 व 28 जनवरी काे आई दरार की वजह से रेगुलेशन पूरी तरह से गड़बड़ा गया। इंदिरा गांधी नहर परियोजना की अनूपगढ़ शाखा सहित विभिन्न वितरिकाओं के किसानों को अंतिम सिंचाई पानी 16 फरवरी तक मिल पाया। वहीं सूरतगढ़ शाखा में 3 मार्च तक पानी मिला। अब आगे सिंचाई पानी नहीं मिल पाएगा।ऐसे में रबी फसलाें काे नुकसान हाेगा। गंगकैनाल में भी पिछले कई दिनाें से पंजाब श्रीगंगानगर को तय हिस्से से कम पानी दे रहा है। इससे कई क्षेत्रों में किसानों की दो बारियां सूखी चली गईं।

पड़ताल: कांग्रेस-भाजपा विधायकों ने दी सहमति, भुगत रहे किसान
इस बार रबी के लिए आईजीएनपी के किसानों को कुल 7 बारी सिंचाई पानी मिला है। गेहूं की फसल पकाने के लिए कम से कम चार सिंचाई की आवश्यकता होती है। वहीं किसानाें का कहना है कि अक्टूबर में जब दाे बारियां मिली, उस समय खरीफ काे भी पानी की जरूरत थी। ऐसे में शुरुआत की दाे बारियाें का लाभ रबी में नहीं मिल पाया।

वहीं पंजाब में बीकानेर कैनाल में दरार का खामियाजा भी भुगतना पड़ा। रबी सीजन के शुरूआत में हुई जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में बिजाई के समय तीन में से एक ग्रुप नहर चलाने का विरोध करते हुए जनप्रतिनिधियों ने एक बारी चार में से दो ग्रुप में चलाने की मांग की।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने उस समय कहा था कि ऐसे में मार्च में पानी की एक भी बारी नहीं मिल पाएगी। उस समय कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने सहमति दी। अब इसका खामियाजा लाखों किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
पड़ताल – श्रीविजयनगर में किसानों ने एसई व एसडीएम काे 4 घंटे बंधक बनाया, आज वार्ता
रबी फसलाें के पकाव के लिए आईजीएनपी के पहले चरण में सूरतगढ़ व अनूपगढ़ शाखा सहित नहराें में सिंचाई पानी की अतिरिक्त बारी देने की मांग काे लेकर आंदाेलित किसानाें ने शुक्रवार काे सिंचाई विभाग के तीनाें गेट बंद कर एसई व एसडीएम सहित कई अधिकारियाें व कर्मचारियों काे बंधक बना लिया।

दिन भर माहाैल तनावपूर्ण रहा। शाम काे कलेक्टर ने एसडीएम प्रियंका बुडानिया के माेबाइल पर श्याेपत मेघवाल से बातचीत की। कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि शनिवार काे सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर हनुमानगढ़ से श्रीविजयनगर पहुंचकर किसानाें से वार्ता करेंगे।

इस पर किसान शांत हुए।तब किसानाें ने शाम 7:30 बजे सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर के गेट खोले। इसके बाद अधिकारी अपने-अपने घरों को जा पाए। इस दौरान पुलिस ने सुरक्षा भी वहां बढ़ा दी। हालांकि किसानाें का धरना जारी रहेगा।

एक्सपर्ट व्यू जयनारायण बेनीवाल, सेवानिवृत्त उपनिदेशक कृषि (आत्मा)
गेहूं में एक सिंचाई जरूरी, पछेती फसल को 2 पानी की जरूरत

गेहूं की फसल के लिए मार्च महीना काफी महत्वपूर्ण होता है। इस समय फसल पकाव पर होती है और तापमान बढ़ता है। इस समय कम से कम एक सिंचाई अति आवश्यक है। जिन खेतों में किसानों ने बिजाई दिसंबर माह में की थी वहां दो सिंचाई की जरूरत है।

पिछले दो-तीन दिनों से तापमान सामान्य है। सिंचाई नहीं होने की स्थिति में अगर 30-31 डिग्री तापमान रहा तो नवंबर में बिजाई की गई गेहूं का उत्पादन 15 और पछेती बिजाई वाले खेतों में पैदावार 30 प्रतिशत तक घटेगी। अगर तापमान में ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई तो उसके अनुपात में उत्पादन भी और घटेगा।

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