किसानों की महापंचायत: राकेश टिकैत ने कहा कि अगर फसलों का भाव नहीं मिला तो कलेक्टर और एसडीएम कार्यालय में जाकर फसल बेचेंगे


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संगरिया2 मिनट पहले

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  • संगरिया में कृषि कानूनों के विरोध में किसानों की महापंचायत, वक्ताओं ने पांच घंटे तक केंद्र को जमकर कोसा

यह आंदोलन किसान का नहीं सबका आंदोलन है। 2021 आंदोलन का साल है। आंदोलनकारियों को लुटेरों के हाथों से बचाना पड़ेगा। यह बात बुधवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता किसान नेता राकेश टिकैत ने कही। मौका था नई धानमंडी में संयुक्त किसान मोर्चा, टोला नाका नगराना संगरिया के आह्वान पर कृषि कानूनों के विरोध में किसानों की महापंचायत का।

टिकैत ने कहा कि पिछले 100 दिन से अधिक हो गए मांग करते हुए कि एमएसपी पर कानून बना दो। देश की हर चीज की कीमतें बढ़ी लेकिन किसानों की फसलों के रेट नहीं बढ़े लेकिन लुटेरे फसलों को आधे रेट में लूट रहे हैं। वे फसलों के रेट नहीं बढ़ने देंगे। हमारे 250 से अधिक लोग इस आंदोलन में शहीद हो गए लेकिन सरकार टस से मस नहीं हो रही। टिकैत ने कहा कि मोदी जी कह रहे हैं कि अपनी फसलों को कही भी बेच लो। हम अपनी फसलों को संसद में लेकर जाकर बेचेंगे। संसद से बढ़िया कोई मंडी नहीं हो सकती। जहां कानून बने हैं वहीं किसान एकजुट होकर अपनी फसलों को बेचेंगे, जो विभाग हमें रोकेंगे उसी विभाग को फसलों को सरकारी रेट पर खरीद करनी पड़ेगी।

वक्ता अभिमन्यु कुहार ने कहा कि मोदी के चश्मे में एक सीसा अडाणी और दूसरी सीसा अंबानी का है। यह आंदोलन जमीर बचाने का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि फसल बचाने के साथ हमें नस्ल भी बचानी है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि 23 फसलों का गारंटी के साथ एमएसपी पर खरीदने का कानून बनना चाहिए। यह हमारी पगड़ी की लड़ाई है। जिसे कानूनों को रद्द करवाने तक लड़ा जाएगा। वक्ता राजाराम मील, युद्धवीर सिंह, अमराराम, मंजीत राय, जगजीत सिंह, जसवीर सिंह भाटी, बलदेव सिरसा ने कहा कि देश को बचाने के लिए बीजेपी की दौड़ लगवानी होगी और एकजुटता रखनी होगी। संयुक्त मोर्चा के लोग दिन-रात इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए लगा है।

सभा में पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल ने भी विचार रखे। मंच संचालन किसान नेता प्रो. ओम जांगू और जिला खाद्य संयुक्त सचिव कुलदीप सहारण ने किया। कार्यक्रम के दौरान किसानों के लिए लंगर, पानी और चाय की व्यवस्था की गई। मौके पर डीएसपी दिनेश राजौरा, सीआई विजय मीणा के नेतृत्व में टिब्बी एसएचओ भूप सहारण, तलवाड़ा थाना नवदीप सिंह, एसआई देवीलाल, मांगूराम, विजेंद्र नेहरा सहित पुलिस जाब्ता, दमकल के कर्मचारी मौजूद थे।

आह्वान: खाट, मच्छरदानी, ट्रैक्टर, राशन अपने साथ रखना, यह आंदोलन लंबा चलने वाला है
टिकैत ने किसानों से कहा कि अपनी मच्छरदानी, खाट, ट्रैक्टर, अपना राशन अपने साथ रखना पड़ेगा। क्योंकि यह आंदोलन लंबा चलने वाला है। युवाओं को नौकरियां नहीं मिलेगी। रेलवे से अगले वर्ष तक लगभग पांच लाख कर्मचारी हटा दिए जाएंगे। बैंक कर्मचारी हड़ताल पर चल रहे हैं। टेलिफोन विभाग के कर्मचारी सहित एफसीआई विभाग सब खत्म हो जाएंगे। कोई स्थाई नहीं रहेगा। हालात ये हो जाएंगे कि खुद खेत का मालिक अपने ही खेत में मजदूरी करता नजर आएगा।

और ये अपील: एक गांव, एक ट्रैक्टर, 15 आदमी और दस दिन, हर गांव में कमेटी बना दो
ये देश में जनक्रांति है। इसकी बागडोर किसान के हाथ में है और किसान ही इस आंदोलन की अगुवाई करेगा। अगर आपको फसलों का भाव नहीं मिला तो कलेक्टर और एसडीएम के कार्यालय में जाकर फसल बेचेंगे। इससे बढ़िया कोई जगह नहीं हो सकती। उन्होंने फार्मूला बताते हुए कहा कि एक गांव और एक ट्रैक्टर तथा 15 आदमी एवं दस दिन। हर गांव में कमेटी बना दो। अपने घर से निकलो तभी आंदोलन सफल हो पाएगा। राजस्थान के लोग हरियाणा के बॉर्डर पर जाकर बैठे। अगर घर से बाहर नहीं निकले तो रोटी तिजोरी की वस्तु बनेगी। कुत्ते भी इस देश में भूख से मरेंगे। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए सरकार को कहा कि 1967 को आधार वर्ष मान कर हमारी फसलों के रेट तय कर दो।

इधर, महापंचायत में समर्थन देने आए पूर्व महानिदेशक को मंच पर जाने से रोका
संगरिया. महापंचायत में समर्थन देने आए पूर्व महानिदेशक राजस्थान पुलिस नवदीप सिंह को मंच पर जाने से रोक दिया गया। खास बात रही कि उन्हें मंच पर नहीं बैठने दिया गया। उनके साथ पूर्व विधायक परम नवदीप भी थी। मंच के पास इस बात को लेकर विवाद होता रहा लेकिन नवदीप सिंह और पूर्व विधायक परम नवदीप को मंच पर नहीं जाने दिया गया। इसके बाद नवदीप सिंह और पूर्व विधायक डॉ. परम मंच के सामने किसानों के साथ ही बैठ गए।

मंडी-बाजार रहे बंद
महापंचायत होने के कारण मजदूरों ने मंडी में पूरे दिन काम नहीं किया। तोला धानका यूनियन, लेबर यूनियन, मनरेगा मजदूरों ने हड़ताल रखी। व्यापार मंडल के आह्वान पर पूरे बाजार में दुकानें बंद रही। वहीं बार एसोसिएशन ने सभी न्यायालयों में कार्य स्थगन रखा।

भास्कर सवाल-जवाब; राकेश टिकैत: मुझे राजनीति में नहीं आना है, यही संगठन किसानों की लड़ाई लड़ेग

सरकार के बीच 12 बार बातचीत हो चुकी है। कोई समाधान नहीं हुआ, अब आगे रास्ता कैसे निकलेगा?
हम रास्ता नहीं निकाल सकते अब तो रास्ता मोदी सरकार निकालेगी। आंदोलन जारी रहेगा किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे।

क्या आप राजनीति में आ रहे हैं या कोई नया किसान संगठन बना रहे हैं?
मुझे राजनीति में नहीं आना है और न ही आएंगे। यही किसानों का संगठन है, कोई भी नया संगठन नहीं बनाना है। इसी संगठन के तहत किसानों के हितों के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।

आंदोलन में कुछ राज्यों के ही किसान सक्रिय हैं, आंदोलन देशव्यापी क्यों नहीं है?
पूरे देश में आंदोलन है। ट्रेनें चल नहीं रही हैं। यह वैचारिक क्रांति है पूरे देश में है। हम पूरे देश में जा रहे हैं। पूरे देश के किसान क्रांति के रूप में उभरेगा। फसलों को कलेक्टर और एसडीएम के यहां बेचेंगे और क्रांति आएगी। हम कर्नाटक और उड़ीसा आदि राज्यों में भी जा रहे हैं।

लाखों की संख्या में ट्रैक्टरों पर संसद पहुंचने की बात आप कह रहे हैं, ये कब होगा?
ट्रैक्टरों पर संसद पहुंचने की बात संयुक्त मोर्चा तय करेगा, अभी तारीख तय नहीं की गई है।

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