कंगारू मदर केयर ट्रीटमेंट: छह माह में ही पैदा हो गई, वजन सिर्फ 760 ग्राम था, मां ने 3 माह रोज 18 घंटे सीने से चिपकाकर रखा, आखिर बच्ची को दे दिया नया जीवन


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उदयपुर3 घंटे पहले

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  • आरएनटी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने एक्सट्रीम प्री-मैच्योर नवजात काे ‘कंगारू मदर केयर’ ट्रीटमेंट से बचाया

सराड़ा की एक महिला ने कंगारू थैरेपी के जरिए समय से पहले पैदा हुई अपनी बच्ची को नया जीवन दे दिया। मेडिकल कॉलेज के बाल चिकित्सालय में उदयपुर के सराड़ा ब्लॉक में रहने वाली धापूबाई का अक्टूबर-20 में छह माह में ही प्रसव हो गया। बच्ची महज 760 ग्राम की थी। बचने की उम्मीद न के बराबर।

आरएनटी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने समय से बहुत पहले जन्म लेने वाली (एक्सट्रीम प्री-मैच्योर) नवजात काे ‘कंगारू मदर केयर’ (सीएमसी) ट्रीटमेंट से बचाने का तरीका काम में लिया। धापूबाई ने बेटी को 90 दिन रोजाना 18 घंटे कोख की तरह सीने से चिपकाकर रखा।

मां से लगातार स्पर्श का असर होने लगा और बच्ची का वजन बढ़ने लगा। बच्ची का वजन डेढ़ किलो हुआ, तब उसे डिस्चार्ज किया गया। यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर साल लगभग 35 लाख बच्चे प्री-मैच्योर होतेे हैं। इनमें से 10 लाख बच नहीं पाते हैं।

26 सप्ताह के नवजात काे बचना बहुत मुश्किल : शिशु रोग विशेषज्ञ
आरएनटी मेडिकल कॉलेज में प्रिंसिपल डॉ. लाखन पोसवाल ने बताया कि आमतौर पर 35 सप्ताह में जन्म लेने वाले नवजात (प्री-मैच्योर) का बचना भी आसान नहीं होता। ऐसे में सिर्फ 26 सप्ताह (एक्सट्रीम प्री-मैच्योर) को बचाना तो और भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सिर्फ मां का संघर्ष और देखभाल ही बच्चे को स्वस्थ रख सकता है।

डेढ़ साल पहले भी 670 ग्राम की बच्ची को इसी तकनीक से बचाया गया

आरएनटी मेडिकल कॉलेज में अक्टूबर-19 में भी ऐसा ही मामला आया था। राजसमंद में देवलीबाई ने 26 सप्ताह की बेटी को जन्म दिया था। उसका वजन महज 670 ग्राम था। नवजात को नाथद्वारा हॉस्पिटल से रैफर किया गया था। तब भी कंगारू मदर केयर ट्रीटमेंट कारगार रहा था।

कंगारू मदर केयर से नवजात व मां का तापमान एक हो जाता है
कंगारू अपने बच्चे को शरीर से चिपकाकर रखता है। इसीलिए इस तकनीक को ‘कंगारू मदर केयर’ तकनीक कहा जाता है। इस तकनीक में नवजात को मां अपने सीने से उसी तरह चिपकाकर रखती है। इससे बच्चे के शरीर का तापमान एक-सा बना रहता है। इससे बच्चे की कई तकलीफ स्वत: ही दूर हो जाती है।

शिशु मृत्यु दर में एक तिहाई संख्या प्री-मैच्योर बच्चों की ही होती है
कई बार कुछ बच्चों का जन्म समय से पहले हो जाता है। शिशु मृत्यु दर में एक तिहाई प्री-मैच्योर शिशु (27 सप्ताह से भी कम समय में एक किलो से भी कम वजन वाले बच्चे) भी शामिल है। ऐसे में इन प्री मेच्योर शिशुओं का वजन बहुत कम होने से स्वास्थ्य की समस्या बनी रहती है। ऐसे समय में बच्चों की देखभाल के लिए चिकित्सक ‘कंगारू मदर केयर’ देने की सलाह देते हैं।

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