ऑपरेशन क्लीन स्वीप: जयपुर क्राइम ब्रांच की ड्रग माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई; सीकर से 5 लोगों को पकड़ा, 3 क्विंटल गांजा बरामद


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जयपुर16 मिनट पहले

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उड़ीसा से 2 हजार रुपए किलो के भाव से गांजा लाकर सीकर, जयपुर क्षेत्र में 15 हजार रुपए की दर से बेचते थे।- प्रतीकात्मक फोटो।

जयपुर क्राइम ब्रांच पुलिस ने मंगलवार एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए ड्रग तस्करी मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पांचों के पास से पुलिस को 2 क्विंटल 92 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ है। ये गांजा जयपुर, सीकर समेत शेखावाटी अंचल और प्रदेश के अन्य शहरों में सप्लाई के लिए लाया गया था। इस कार्रवाई में 2 तस्कर और तीन रिसिवरों को पकड़ा है। जिनसे अब पुलिस पूछताछ कर इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।

पुलिस आयुक्त आनन्द श्रीवास्तव ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि सीकर, जयपुर समेत आस-पास के इलाकों में मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही है। इस मामले में सीएसटी टीम का गठन कर इस अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क काे खंगाला गया। सूचना पर टीम ने सीकर जिले के नेछवा थाना इलाके में दबिश देकर वहां से लोगों को गिरफ्तार किया, जो इस नशे के अवैध कारोबार से जुड़े थे। टीम ने टी. श्रीनिवासन (39) निवासी उड़ीसा, रवि कुमार पारिड़ा (28) निवासी उड़ीसा, विजय कुमार (38) निवासी सीकर और राजेश कुमार (23) निवासी सीकर को गिरफ्तार किया है।

2 हजार में लाकर 15 हजार रुपए में बेचते थे गांजा
पूछताछ में गांजा सप्लाई करने वाले आरोपी श्रीनिवासन और रवि कुमार ने बताया कि वे ये गांजा उड़ीसा से निजी कार में लेकर आते थे और जयपुर, सीकर सहित आस-पास के क्षेत्रों में सप्लाई करते थे। उन्होंने बताया कि वे ही राजेश और विजय को गांजा देते थे। इससे पहले ये लोग राहुल कुमार (20) निवासी सीकर को गांजा सप्लाई करते थे। आरोपियों के बताने पर पुलिस ने की टीम ने राहुल को भी दादिया थाना क्षेत्र सीकर से धरदबोचा, जिसके पास से 28 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। सप्लायर श्रीनिवासन और रवि कुमार ने बताया कि वे ये गांजा उड़ीसा से 2 हजार रुपए किलोग्राम की दर से खरीदते और यहां लाकर 15 हजार रुपए की दर से बेचते हैं।

दिल्ली के रास्ते से करते थे राजस्थान में प्रवेश
क्राइम ब्रांच पुलिस ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे दिल्ली के मार्ग से राज्य में प्रवेश करते और सीकर, जयपुर में आकर गांजा सप्लाई करते। उन्होंने बताया कि निजी वाहनों का उपयोग इसलिए करते थे, ताकि आने-जाने में बाइपास पर चैकिंग बहुत कम होती थी। वे दिल्ली के रास्ते राजस्थान में प्रवेश करना सबसे ज्यादा सुरक्षित मानते है, इसलिए अक्सर दिल्ली बाइपास से ही जयपुर आया करते थे।

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