उदयपुर स्मार्ट सिटी बनने की दाैड़ में: प्रदेश में चार शहर स्मार्ट बनने हैं, उदयपुर सबसे पहले बनेगा, 80% तक काम पूरा


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उदयपुर6 मिनट पहले

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  • कुम्हारों का भट्टा फ्लाईओवर व आयड़ नदी विकास योजना काे छाेड़ सभी काम दिसंबर तक हो जाएंगे पूरे

प्रदेश में चार शहर जयपुर, काेटा, अजमेर और उदयपुर स्मार्ट सिटी बनने की दाैड़ में हैं, लेकिन इन सब में हमारा उदयपुर सबसे पहले स्मार्ट सिटी बन जाएगा। इसके कारण भी हैं। यहां स्मार्ट सिटी से जुड़ा लगभग 80% काम हाे गया है और महज 20% बाकी हैं। इनमें पेयजल, सीवर, सड़क और बिजली लाइन जैसे काम हैं, जाे अक्टूबर अंत तक पूरे हाे जाएंगे। जयपुर में अभी तक 10%, काेटा में 30% और अजमेर में 40% फीसदी काम ही पूरे हुए हैं। उदयपुर काे जनवरी 2016 में स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल किया गया था। 25 जून 2016 काे कामाें की शुरुआत हुई थी। स्मार्ट सिटी के तहत सबसे बड़ा काम 537 कराेड़ का एरिया बेस्ड डेवलपमेंट (एबीडी) पैकेज के तहत वाॅलसिटी के 18 वार्डों में चल रहा है। 46 बड़े काम पूरे हाे चुके हैं और 44 प्रगति पर हैं, जाे मई-21 तक पूरे हाे जाएंगे। और 6 की डीपीआर प्रक्रिया में हैं।

शहर की भोगौलिक स्थिति व लॉकडाउन से बदली रणनीति

लाॅकडाउन से छह महीने काम पूरी तरह ठप रहने के बाद दाे शिफ्टों में दिन और रात काम करवाया जा रहा है। लॉकडाउन से पहले रोजाना 1500-1600 लेबर काम करती थी। संशोधित लॉकडाउन में 400-500 से काम शुरू करवाया। अब 1100 लेबर तक पहुंच गई है।

^लाॅकडाउन से छह माह काम ठप रहा। अब सीईओ नीलाभ सक्सेना और हमारी टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। कुम्हारों का भट्टा फ्लाईओवर और आयड़ नदी काे छाेड़कर सभी काम दिसंबर तक पूरे हाे जाएंगे। -प्रदीप सांगावत, एसीईओ, स्मार्ट सिटी

उदयपुर को अब तक कहां से कितना पैसा मिल चुका

  • 343 केंद्र सरकार
  • 220 राज्य सरकार
  • 50 यूआईटी
  • 51 नगर निगम

(राशि कराेड़ रुपए में)

काेटा : 16 काम मंजूर, 9 टेंडर में, 70% बाकी

979.37 करोड़ के कुल 43 काम मंजूर हुए। इसमें से 16 ही पूरे हुए। 23 पर काम चल रहा है। एक टेंडर प्रक्रिया में है। 243 कराेड़ के छोटे काम पूरे हुए हैं, लेकिन दशहरा मैदान के विकास के अलावा कोई बड़ा काम नहीं हुआ है। 767 कराेड़ के 22 काम चल रहे हैं, जाे साल के अंत तक पूरे हाे सकेंगे। ऐसे में 2022 तक ही काम पूरे होने की संभावना है।

जयपुर : 21 काम पूरे, 26 अटके, 90% बाकी
स्मार्ट सिटी में जयपुर के लिए बजट 1298 कराेड़ का है, लेकिन अब तक 285 कराेड़ के काम ही हाे पाए हैं, यानी करीब 10% ही काम हुए। 448 कराेड़ के 26 ऐसे काम कागजों में अटके हुए हैं। अंडरग्राउंड केबलिंग का 50% काम बाकी है। जेसीटीएसएल व ट्रैफिक मैनेजमेंट की सही प्लानिंग ही नहीं हाे पाई। ऐसे में 2022 में भी काम पूरा होना संभव नहीं।

अजमेर: 40% काम पूरे, 2022 में बनेगा स्मार्ट
अजमेर में 910 कराेड़ का प्लान। सरकार से 379 कराेड़ मिल चुके हैं, लेकिन खर्च 296 कराेड़ ही हुए हैं। अजमेर में 36.68 कराेड़ के 23 काम पूरे हुए हैं और 481.91 कराेड़ के 68 काम प्रगति पर हैं। 292.79 कराेड़ के 10 कार्य टेंडर प्रक्रिया में हैं, जबकि 173.60 कराेड़ के 28 कार्याें की डीपीआर प्रक्रियाधीन है। अजमेर में स्मार्ट सिटी के काम 2022 तक पूरे होंगे।

वॉलसिटी में ये बड़े काम हाे चुके

  • 25, 10 और 5 एमएलडी के तीन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट शुरू हुए।
  • 60 से अधिक स्मार्ट बस शेल्टर का काम हाे चुका है।
  • ऐेतिहासिक दरवाजों और शहर काेट का संरक्षण।
  • वॉलसिटी के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम और सरकारी भवनाें पर सोलर पैनल का काम हाे चुका है।
  • तीतरड़ी में कचरे की कैपिंग का कार्य पूरा हो चुका।
  • कुम्हारों का भट्टा के पास वेस्ट सेंटर बन चुका है। कचरा यहां से इकट्ठा कर टीपर से बलीचा ट्रेचिंग ग्राउंड ले जा रहे।

12 बड़े काम चल रहे : 4 काम मार्च तक और 8 अक्टूबर 2021 तक पूरे हाे जाएंगे

  • सीवरेज : कुल 83 किमी लाइन में से 60 किमी डल चुकी।
  • पेयजल : 78.6 किमी में से 59 किमी लाइन डाल चुके।
  • डक्ट : 150 किमी में से 110 किमी बन चुकी है। इससे राेड कटिंग के लिए बार-बार सड़कें नहीं खोदनी पड़ेगी।
  • बरसाती नाली : पानी की निकासी के लिए 136 किमी लंबी नाली में से 70 किमी लंबी नाली बन चुकी है।
  • सड़क : 91 किमी बननी है, 60 किमी बन चुकी।
  • मुख्य सड़कें : 10.8 किमी बननी हैं। 5 किमी बन चुकी।
  • बिजली : 66 मी. लंबी हाइटेंशन लाइन में से 30 मी., 6 लाख 90 हजार मी. लाे टेंशन लाइन में से 5.50 लाख मी. डली चुकी है। 2075 फीडर पिलर में से 1000 बन चुके।
  • ट्रांसफॉर्मर : 87 छोटे ट्रांसफार्मर में से 50 लग चुके। 119 बड़े ट्रांसफॉर्मर में से 75 लग चुके हैं।
  • वाटर ट्रीटमेंट : वॉलसिटी में 24 घंटे पानी सप्लाई के लिए माछला मगरा पर 23.47 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट मार्च तक पूरा हाेगा। पहले चरण में खांजीपीर, शिव काॅलाेनी, शिवाजी नगर व सर्वऋतु विलास में सप्लाई।
  • हेरिटेज संरक्षण व बलीचा में कचरा निस्तारण के काम।
  • बलीचा-हिरणमगरी में स्मार्ट राेड का काम अंतिम चरण मेंं।

अब हर माह का 7 किमी का टारगेट

पहले हर महीने 2-3 किमी काम का टारगेट था, जिसे अब सात किमी कर दिया है। वॉलसिटी में सर्वऋतु विलास, खांजीपीर, माेगरावाड़ी, कालाजी गाैराजी अंदर, सुथारवाड़ा, बाेहरवाड़ी, खांजीपीर, धानमंडी के पीछे का एरिया, अश्विनी बाजार में तेजी से काम चल रहा है।

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