अवैध तस्करी: पंजाब से बीकानेर तक राेजाना तस्करी हाेता है 40 हजार लीटर तेल, हर माह ₹10 करोड़ का श्रीगंगानगर काे घाटा


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श्रीगंगानगर20 दिन पहले

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साधुवाली से गुमजाल तक 9 किमी में 14 पेट्रोल पंप यहां पंप हो रहे बंद

  • श्रीगंगानगर के मुकाबले पंजाब में पेट्रोल 10.15 रु. और डीजल 11.10 रु. सस्ता, राेज तस्करी जिम्मेदार खामोश

पंजाब में पेट्राेलियम पदार्थों पर वैट की दर राजस्थान की अपेक्षा कम होने से डीजल व पेट्रोल की बड़े स्तर तस्करी होती है। रोजाना करीब 40 हजार लीटर तेल अवैध तौर पर पंजाब के पेट्रोल पंपों से खरीद कर राजस्थान में श्रीगंगानगर से बीकानेर जिले तक बेचा जाता है।

पंजाब का पेट्रोल राजस्थान की अपेक्षा 10.15 रुपए और डीजल 11.10 रुपए प्रति लीटर सस्ता होने से रेटों में आए भारी अंतर ने तस्करी को बढ़ावा दिया है। इसकी मार श्रीगंगानगर जिले के पेट्रोल पंपों को झेलनी पड़ रही है। हर महीने तेल का करीब 10.53 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित होता है। हालात ये हैं कि बिक्री की कम होने से जिला मुख्यालय से कई पेट्रोल पंप बाहर शिफ्ट हो चुके हैं।

वहीं, जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर स्थित पंजाब में नए पेट्रोल लगे हैं। राजस्थान से सटा पंजाब का क्षेत्र पेट्रोल पंप उद्याेग के लिए मुफीद बना हुआ है। वहां थोड़े समय में ही नए पेट्रोल पंप लगे हैं। पंजाब में साधुवाली से गुमजाल तक 9 किलोमीटर में 14 पेट्रोल पंप लग चुके हैं।

तरीका जीप से जोड़ते हैं ट्रॉली वाहन, फिर पंजाब से लाते हैं 2500 से 5000 लीटर तेल
पंजाब में राजस्थान से पेट्रोल व डीजल सस्ता होने की वजह से अबोहर से श्रीगंगानगर आने वाले वाहन साधुवाली के समीप पंजाब क्षेत्र के पेट्रोल पंपों से तेल भरवाते हैं। श्रीगंगानगर शहर से काफी संख्या में वाहन भी तेल का टैंक भरवाने पंजाब जाते हैं। इतना ही नहीं कई वाहनों में अतिरिक्त टैंक भी फिट करवा रखे हैं, इसमें तेल लाया जाता है। यहां तक कि कुछ लोगों ने 2500 से 5000 लीटर की मोबाइल टंकियां भी बना रखी हैं जिन्हें जीप या फिर किसी अन्य वाहनों के पीछे जोड़कर तेल की तस्करी की जाती है। श्रीगंगानगर जिले के अलावा बीकानेर और नोखा तक भी तस्करी का डीजल व पेट्राेल ले जाया जाता है।

मुनाफा बीकानेर का परिवहन का खर्च 5 हजार, 5 हजार लीटर तेल में ₹50 हजार का फायदा
पंजाब सीमा से बीकानेर तक जीप से बड़ी मोबाइल टंकी में 5 हजार लीटर तेल ले जाने पर वाहन का डीजल खर्च करीब 5 हजार रुपए बैठता है। वहीं, 5 हजार लीटर पंजाब से लाया डीजल राजस्थान में 55 हजार रुपए सस्ता पड़ता है। पांच हजार रुपए परिवहन खर्च निकालने के बाद भी 50 हजार रुपए की बचत होती है।

एक मोटे अनुमान के अनुसार पंजाब से तस्करी कर लाया जाने वाला रोजाना का 40 हजार लीटर तेल अगर राजस्थान के पंपों से बिके तो हर रोज का 35.10 लाख रुपए और महीने का 10.53 करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान होता है। पंजाब के रेट के हिसाब से इसकी कीमत 9.19 करोड़ रुपए बनती है। यानी पंजाब का तेल 1.34 करोड़ रुपए सस्ता पड़ता है।

दर्द यह भी…अंतर बढ़ा तो शिफ्ट करना पड़ा पंप, अब भी राहत नहीं क्योंकि घड़साना-रावला तक हो रही तस्करी
पेट्रोल पंप कारोबारी जेएम कामरा के अनुसार उन्होंने एनएच पर साधुवाली के समीप पेट्रोल पंप लगाया था। वर्ष 2002 में पंजाब की अपेक्षा यहां तेल 3 से 4 रुपए महंगा होने से बिक्री बहुत कम होने लगी। तब उन्होंने अपना पंप यहां से 150 किलोमीटर दूर घड़साना शिफ्ट करना पड़ा।

इनके अलावा अन्य पंप भी शिफ्ट हुए थे। जेएम कामरा के अनुसार घड़साना में कुछ समय काम ठीक चला। जब से तेल के रेट में 10 रुपए लीटर का फर्क आया है, तब से घड़साना में भी बिक्री कम होने लगी है। जिला पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विमल बिहाणी के अनुसार कई बार जिला प्रशासन स्तर पर राज्य सरकार तक पेट्रोलियम पदार्थों की अंतरराज्यीय तस्करी रोकने और वैट की दर पंजाब के बराबर कर रेट का अंतर कम करने की मांग हो चुकी है। लेकिन उनकी मांग को नजरअंदाज ही कर दिया जाता है।

लापरवाही रात को ज्यादा तस्करी, रोकटोक नहीं
डीजल व पेट्रोल का ज्यादातर अवैध परिवहन रात के समय ही होता है। राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित साधुवाली अंतरराज्यीय चेक पोस्ट के अलावा हिंदुमलकोट रोड पर कोठा, सादुलशहर शहर मार्ग पर पतली बैरियर सहित लिंक नहर क्षेत्र में पंजाब जाने व आने के 10 रास्ते हैं। इन्हीं रास्तों में से ज्यादातर पर नाकेबंदी कभी कभार ही होती है। रात के समय ज्यादा रोकटोक नहीं होती। इसी वजह से रात के समय तस्करी ज्यादा होती है।

अनदेखी छूट की आड़ में लोग कर रह हैं तस्करी
केंद्र सरकार ने किसानों को कृषि कार्यों के लिए 2500 लीटर तक डीजल लाने और भंडारण की छूट दे रखी है। इसी आड़ में तस्करी होती है। कृषि कार्यों के नाम पर बड़ी टंकियों में भी तस्करी के लिए डीजल परिवहन कर लाया जाता है। पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विमल बिहाणी के अनुसार अंतरराज्यीय बॉर्डर पर पड़ताल नहीं की जाती कि जो बड़ी मात्रा में डीजल ले जा रहा है उसकी खेती के लिए इतनी खपत हो सकती है या नहीं। जमीन की जमाबंदी व अन्य कागजात चेक नहीं किए जाते। डीएसअो राकेश सोनी के अनुसार जो तेल परिवहन का दुरुपयोग करता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

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