अलवर में बड़े घोटाले का पर्दाफाश: आरटीओ वाले दलाल बना रहे थे कॉलेजों की फर्जी मार्कशीट, खड़े-खड़े बना देते थे सरकारी दस्तावेज, कार्रवाई जारी


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अलवर13 दिन पहले

आरटीओ से कार्रवाई के बाद कुछ लोगों को थाने लेकर आई पुलिस।

  • जिले में पहली बार फर्जीवाड़े इतनी बड़ी कार्रवाई
  • लाइसेंस और आरसी की चिप भी असली जैसी

अलवर में आरटीओ कार्यालय के बाहर फर्जीवाड़े का बड़ा खेल पकड़ा गया है। ऑफिस के बाहर बैठे दलाल फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ही नहीं, सरकारी कॉलेजों की अंकतालिकाएं भी 500 से 1500 रुपए लेकर 15 मिनट में बना देते हैं। यह फर्जीवाड़ा सदर थानाधिकारी ज्येष्ठा मैत्रेयी IPS ने पकड़ा है। सोमवार शाम करीब साढ़े चार बजे QRT और पुलिस थाने का फोर्स के साथ दलालों के अड्डे पर धावा बोला। दलालों के ठिकानों से फर्जी आरसी, लाइसेंस, आधार कार्ड, मार्कशीट सहित कई तरह के दस्तावेज, स्कैनर, प्रिंटर मशीनें भी जब्त की है।

इस तरह की कई मशीन जब्त की गई। गाड़ी में रखी नम्बर प्लेट।

थाना प्रभारी का चैम्बर भर गया
दलालों के यहां से पुलिस दल ने कम्प्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, चिप, कार्ड, सहित अनेक तरह के उपकरण जब्त किए हैं। जो फर्जी दस्तावेज बनाने के काम लिए जाते हैं। करीब सात से आठ दलाल व ई-मित्र के ठिकानों पर कार्रवाई की गई। इतने उपकरण जब्त करने पड़े कि थाना प्रभारी ज्येष्ठा का चैंबर भर गया।

कई दिन पड़ताल, फिर बनवाई अंकतालिका
पुलिस के अनुसार करीब 10 दिनों से इस पूर मामले तक पहुंचने की पड़ताल जारी थी। बोगस ग्राहक बनकर लाइसेंस व अंकतालिका बनवाई है। पुलिस से भी लाइसेंस व आरसी के 1500 रुपए लिए हैं। इस फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद ही आईपीएस ने पुलिस थाने व क्यूआरटी की टीम लेकर कार्रवाई को अंजाम दिया। एक साथ छह टीम बनाकर अलग-अलग दलालों की दुकान पर छापा मारा। फर्जीवाड़े के ठिकानों पर पहुंचते ही पुलिस ने कहा कि भागने की कोशिश नहीं करें। पुलिस जांच करने आई है। इसके बाद उनके उपकरण जब्त किए गए और संबंधित लोगो को थाने लाया गया।

पूरा खुलासा होने में समय लगेगा
आईपीएस ज्येष्ठा मैत्रेयी ने बताया कि कई कम्प्यूटर, स्कैनर, कार्ड, चिप, दस्तावेज मिले हैं। सबकी जांच में समय लगेगा। अभी पकड़े गए लोगों से पूछताछ भी पूरी नहीं हो सकी है। लेकिन, यह सही है कि अंकतालिका, लाइसेंस व आरसी सहित कई तरह के दस्तावेज कुछ ही मिनट में फर्जी तरीके से बना देते हैं।

दलालों के भी दलाल
इस फर्जीवाड़े में दलालों के भी दलाल खड़े हैं। मतलब दलालों के पास भी विश्वसनीय लोगों को ही लाने की जिम्मेदार दूसरे दलालों की होती है। उनके जरिए आने वालों के ही फर्जी कागजात बनाते हैं। सामान्य तौर पर बिना किसी की जान पहचान के कोई आता है तो उसे मना भी कर देते हैं।

आरटीओ कार्यालय के बाहर
यह सब आरटीओ कार्यालय के बाहर सालों से हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के स्तर से कभी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। उसी का परिणाम है पहले दलाल आरटीओ कार्यालय के अन्दर का कामकाज कराने का पैसा लेते थे। धीरे-धीरे सब फर्जी बनाने लग गए। पहले कभी कभार ही फर्जी आरसी व लाइसेंस का मामला पकड़ में आता था। अब तो फर्जीवाड़े की कई दुकानें जम गई। मतलब जिम्मेदार भी चुप्पी साधे रहे।

कोई संख्या नहीं कितने फर्जी लाइसेंस बन गए
पकड़े गए फर्जीवाड़े के हिसाब से बड़ी संख्या में फर्जी लाइसेंस, आरसी व अन्य दस्तावेज बनाए जा चुके हैं। इसकी कोई गिनती नहीं है। यही कागजात जरूरत की जगहों पर काम लिए जाते हैं। इस कारण यहां के फर्जीवाड़े की चेन कई तरह की नौकरी के दस्तावेजों तक भी जुड़ी हो सकती है।

बाजार में मिल रही चिप
लाइसेंस व आरसी की चिप बाजार में मिल रही है। पुलिस ने बाद में ऐसी चिप बेचने वालों तक भी पहुंचने की कोशिश की है। ये चिप असली लाइसेंस व आरसी जैसी दिखती हैं। इन चिप को ही स्कैन करके लाइसेंस व आरसी बना दी जाती हैं। जो दिखने में पूरी तरह असली होती है।

कॉलेज आचार्य व बड़े अधिकारियों की मुहर भी
इनके पास कॉलेज आचार्य व बड़े अधिकारियों की मुहर भी मिली है। ये मुहर फर्जी अंकतालिका बनाने के बाद मुहर भी लगाकर देते हैं। ताकि कहीं कोई शक की गुंजाइश ही नहीं हो। अंकतालिका भी असली जैसी हूबहू बना देते हैं। निजी स्कूलों के प्राचार्य की मुहर भी मिली हैं।

दंग रह गए अधिकारी
आईपीएस अधिकारी भी यह सब देख कर दंग रह गई। उन्होंने कहा कि 15 सौ रुपए लेना बड़ी बात नहीं है। आप देखिए इतने बड़े दस्तावेज बनाकर दे रहे हैं। इन दस्तावेजों का महत्व देखिए। कहां-कहां काम आते हैं। इससे तो न जाने कितनी जगहों पर इन दस्तावेजों से फर्जीवाड़ा हो चुका होगा।

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