अलग आदिवासी धर्म कोड का विरोध: केंद्रीय मंत्री फगन सिंह कुलस्ते बोले- अलग धर्म कोड की मांग समाज को बांटने की साजिश, आदिवासी ही पहला सनातनी हिंदू


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जयपुर8 घंटे पहले

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केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री फगनसिंह कुलस्ते ने राजधानी में आदिवासियों पर संगोष्ठी में हिस्सा लिया।

  • जयपुर में एक ही दिन में अलग धर्म कोड के पक्ष और विरोध में संगोष्ठी-सम्मेलन

आदिवासियों को हिंदू धर्म से अलग मानने और अलग धर्म कोड बनाने की मांग का केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री फगन सिंह कुलस्ते ने विरोध किया। कुलस्ते ने कहा कि आदिवासी पहले सनातनी हिन्दू हैं। इनकी पूजा पद्धति और हिंदुओं की पूजा में कोई अंतर नहीं है। कुछ लोग आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की मांग उठा रहे हैं। वे लोग धर्म और समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। कुलस्ते शनिवार को झालाना में सनातनी आदिवासी मीणा संस्था की ओर से आदिवासी समाज का सांस्कृतिक व धार्मिक इतिहास विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे।

कुलस्ते ने कहा कि भाजपा हमेशा छोटे राज्यों के पक्ष में रही है। जो अलग आदिवासी राज्य की मांग उठा रहे हैं, ऐसे लोगों की राजनीतिक मजबूरी हो सकती है। उन्होंने आगे कहा,’आदिवासियों की वजह से जंगल बचा हुआ है। आदिवासियों के सामने खुद को आदिवासी साबित करने का संकट है। आदिवासियों का इतिहास नहीं लिखा गया,क्योंकि हमारे लोग पढ़े-लिखे नहीं थे। इसलिए कभी सही तथ्य सामने नहींं आए। आज इस वर्ग को वोट बैंक बना दिया है। आदिवासियों के धर्म परिवर्तन के प्रयास भी चल रहे हैं, आदिवासियों का धर्मांतरण स्वीकार नहीं किया जाएगा।’

आदिवासियों को भड़काया जा रहा : पंकज मीणा
आदिवासी मीणा संस्था के अध्यक्ष पंकज मीणा ने कहा कि जब आराध्य देव समान, पूजा पद्धति समान, तो आदिवासी हिन्दू से अलग नहीं हो सकता। पौराणिक ग्रंथों, सिन्धु घाटी सभ्यता के अवशेषों से पता चलता है कि भारत के आदिवासी भगवान शिव और अपनी कुलदेवी की पूजा करते थे। धर्मान्तरण को बढ़ावा देने वाले आदिवासी समाज को भड़का रहे हैं।

एक ही दिन में अलग धर्म कोड के पक्ष और विरोध में संगोष्ठी-सम्मेलन
कांग्रेस, बीटीपी से जुड़े आदिवासी विधायकों का एक वर्ग अलग धर्म कोड की मांग करते हुए मुहिम चला रहा है। राजधानी में शनिवार को कांग्रेस बीटीपी से जुड़े विधायकों ने एक मंच से आदिवासियों को हिंदू धर्म से अलग गिनने की बात कही। दूसरी तरफ सनातनी आदिवासी मीणा संस्था की गोष्ठी में आदिवासियों के अलग धर्म कोड का विरोध किया गया।

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