अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: कचरे के ढे़र से मिलेगी निजात; 3 लाख 60 हजार टन कचरा साफ करने के लिए खर्च होंगे 9 करोड़


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अजमेर23 मिनट पहले

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माखुपुरा ट्रेचिंग ग्राउंड पर लगा कचरे का ढेृर

अजमेर के माखुपुरा ट्रेचिंग ग्राउंड पर एकत्र होने वाले कचरे के ढे़र से निजात मिलेगी। पुराने और प्रत्युक्त 3 लाख 60 हजार टन कचरा साफ करने के लिए 9 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके लिए अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जल्द ही कार्यादेश जारी किए जाएंगे।

वर्तमान में अजमेर शहर में लगभग 250 टन कचरा प्रतिदिन एकत्र हो रहा है। जो कि माखुपुरा ट्रेंचिंग ग्राउंड में डाला जा रहा है। यह व्यवस्था गत 15 वर्षों से जारी है। जिसके चलते वहां 3 बीघा क्षेत्र में कचरा फैल चुका है। यहां पर 15 से 20 फीट लिगेसी वेस्ट (पुराना एवं प्रत्यक्त कूड़ा) के पहाड़ बने हुए हैं एवं उक्त भूमि का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

लिगेसी वेस्ट के कार्यादेश के बाद उपलब्ध कचरे का सर्वे कराकर कचरे को अलग-अलग करने के लिए ट्रोमल ( मशीन ) लगाई जाएगी। जिससे विभिन्न साइज एवं विभिन्न प्रकार के कचरे को अलग-अलग किया जाएगा। कचरे में प्राप्त उपयोगी वस्तु जैसे-प्लास्टिक, कागज आदि को उपयोग के अनुसार ठेकेदार द्वारा ही निस्तारित किया जाएगा। शेष रही मिट्‌टी को ट्रेंचिंग ग्राउंड में ही बिछाकर समतल किया जाएगा। इस कार्य पर लगभग 9 करोड़ व्यय होने का अनुमान है।

प्लांट में पुराने कूड़े से प्लास्टिक, पॉलीथिन आदि ज्वलनशील पदार्थ को अलग किया जाएगा। इसके अलावा मिट्टी और कंक्रीट को भी अलग-अलग किया जा सकेगा। लिगेसी वेस्ट से निकलने वाले प्लास्टिक का इस्तेमाल ईंधन के रूप में हो सकेगा। इस ईंधन की डिमांड सीमेंट फैक्ट्रियों में रहती है।

15 करोड़ की लागत: बनेगा 300 टन की क्षमता का परिशोधन संयंत्र
अजमेर शहर में प्रतिदिन नए आने वाले कचरे के लिए 300 टन प्रतिदिन क्षमता के परिशोधन संयंत्र लगाने के लिए वित्तीय निविदा खोली जा चुकी है। इस कार्य पर 15 करोड़ के खर्च का अनुमान है।

  • प्रोसेंसिंग संयंत्र में सूखा एवं गीला कचरे को अलग-अलग किया जाएगा। गीले कचरे से खाद बनाई जाएगी। जिसका उपयोग जैविक खेती के लिए किया जा सकेगा।
  • सूखे कचरे में से प्लास्टिक, कागज इत्यादि को अलग करके ईंधन की ब्रिक्स बनाई जा सकेगी जो कि बायलर आदि में ईंधन के रूप में कार्य में ली जा सकेगी।
  • एकत्र किए गए कचरे में 10 प्रतिशत कचरा ऐसा होता है, जिसका उपयोग नहीं हो सकता। ऐसे कचरे के लिए आगामी 15 वर्षों की गणना करते हुए 1 लाख 25 हजार घन मीटर क्षमता की सेनेटरी लैंडफिल भी बनाया जाना प्रस्तावित है।

ये होगा लाभ…

  • कचरे में लगाई जानी वाली आग से आस-पास का वातावरण दूषित होता है। कचरे का समय पर परिशोधन होने से वातावरण शुद्ध रहेगा।
  • बरसात के दिनों में कचरे में पानी जाने के कारण भूमिगत जल दूषित होने की संभावना बनी रहती है। उससे भी मुक्ति मिलेगी।
  • कचरे का समय पर उपयोग होने से कम जमीन की जरूरत पडे़गी और जमीन का अन्य उपयोग भी हो सकता है।

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