अजमेर कलेक्ट्रेट पहुंचकर जताया रोष: बरना के ग्रामीण हुए लामबंद; कहा- 50 सालों से कर रहे निवास, अब बता रहे अतिक्रमण, रोकी जाए वन विभाग की कार्रवाई


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अजमेर37 मिनट पहले

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विरोध प्रकट करते बरना के ग्रामीण

अजमेर जिले के बरना में वन विभाग की कार्रवाई से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों का कहना है राज्य सरकार ने नि:शुल्क पट्टे देकर मकान बनाए और वे यहां पचास सालों से रह रहे है। ग्रामीणों ने जिला कलक्टर कार्यालय पहुंचकर वन विभाग की कार्रवाई को रोके जाने की मांग की है।

अजमेर आए राजेन्द्र प्रसाद, कालीदेवी आदि ने बताया कि इन्द्रा आवास योजना के तहत सन 1984 में राज्य सरकार की ओर से कॉलोनी के लिए भूमि आवंटित हुई थी, जिसमें राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क पट्टे व मकान बनाकर दिए गए। यहां वर्तमान में 200 परिवार निवास कर रहे है। उनको किसी भी प्रकार की सूचना दिए बगैर तथा ग्राम पंचायत हल्का पटवारी को बिना सूचना दिए मकानों को जे.सी.बी. की सहायता से हटाया जा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग की ओर से पचास वर्ष पूर्व में सीमेन्ट के पीलर बनाकर अपनी सीमा कायम की गई थी तथा वन विभाग की सीमा पर पक्की बाउण्ड्रीवॉल सन-2008 में की गई है। उसके बावजूद उस सीमा को पार करके वर्तमान में वन विभाग की कार्रवाई से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने कहा कि विधायक को भी अवगत कराया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने कलक्टर से वन विभाग की कार्रवाई रूकवाने की मांग की है।

वन विभाग की है जमीन

इस सम्बन्ध में बात करने पर क्षेत्रीय वन अधिकारी जगदीश शर्मा का कहना रहा कि यह जमीन वन विभाग की है। पन्द्रह दिन पहले सर्वे कराया और उस समय ग्रामीणों ने कोई पट्टे नहीं दिखाए। कल जब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, तब भी कोई पट्टे नहीं दिखाए। अब जब अतिक्रमण टूट रहा है तो कोई भी शिकायत कर सकता है। अधिकांश अतिक्रमण हटा दिया गया है और बचा हुआ भी हटा दिया जाएगा।

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